पप्पू यादव: सियासत में लगातार सफलता का स्वाद चखने वाला पथिक

बिहार के बाहुबली नेता राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव मधेपुरा से सांसद हैं और इस बार भी वहीं से चुनाव मैदान में हैं. पप्पू यादव आज बिहार के कोसी अंचल के एक लोकप्रिय नेता हैं. पप्पू यादव जनता की जरूरतों के लिए अपने घर के खुले दरवाजे और पढ़ने-लिखने में रुचि के लिए भी जाने जाते हैं.

Advertisement
राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव

दिनेश अग्रहरि

  • नई दिल्ली,
  • 22 अप्रैल 2019,
  • अपडेटेड 1:12 PM IST

बिहार के चर्चित और बाहुबली नेता राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव मधेपुरा से सांसद हैं और इस बार भी चुनाव मैदान में हैं. अपराध और विवादों से घिरे रह चुके पप्पू यादव आज बिहार के कोसी अंचल के एक लोकप्रिय नेता हैं. अपनी इस लोकप्रियता की वजह से ही वह बिहार के अलग-अलग इलाकों से पांच बार सांसद रह चुके हैं और छठी बार मधेपुरा से चुनावी मैदान में हैं. पप्पू यादव जनता की जरूरतों के लिए अपने घर के खुले दरवाजे और पढ़ने-लिखने में रुचि के लिए भी जाने जाते हैं.

Advertisement

उनका जन्म 24 दिसंबर, 1967 को बिहार के पूर्णिया जिले के खुरदा करवेली गांव में एक जमींदार परिवार में हुआ था. उनकी पत्नी रंजीता रंजन सुपौल से कांग्रेस की सांसद हैं. उनकी दो संतान सार्थक रंजन और प्रकृति रंजन हैं. उनका बेटा सार्थक रंजन क्रिकेट खिलाड़ी है. पप्पू यादव अपने इलाके में काफी लोकप्रिय हैं और वह 1991, 1996, 1999 और 2004 में बिहार के अलग-अलग संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं. वह समाजवादी पार्टी, लोक जनशक्ति पाटी और राष्ट्रीय जनता दल जैसे कई दलों से जुड़े रह चुके हैं. उन्हें साल 2015 में सर्वश्रेष्ठ सांसद का सम्मान मिल चुका है. उन्होंने मधेपुरा के बीएन मंडल यूनिवर्सिटी, मधेपुरा में रजानीति शास्त्र में स्नातक और इग्नू से डिजास्टर मैनेजमेंट एवं ह्यूमन राइट्स में डिप्लोमा किया है.

विवादों से भी रहा नाता

Advertisement

राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव 1990 में निर्दलीय विधायक बनकर बिहार विधानसभा में पहुंचे. बाद का उनका सियासी सफर आपराधिक मामलों के कारण विवादों से भरा रहा. विधायक बनने वाले पप्पू यादव ने बहुत कम वक्त में कोसी क्षेत्र के कई जिलों में अपना प्रभाव बढ़ा लिया. उन्होंने मधेपुरा, पूर्णिया, सहरसा, सुपौल और कटिहार जिलों में काफी प्रभाव बनाया है. सबसे पहले साल 1990 में उन्हें राजनीतिक सफलता मिली, जब वह सिंहेश्वरस्थान से बिहार के निर्दलीय एमएलए चुने गए. इसके बाद 1991 में ही वह पूर्ण‍िया से सांसद चुन लिए गए.

साल 2009 में पटना हाईकोर्ट ने चुनाव लड़ने की इजाजत देने की पप्पू यादव की याचिका को खारिज कर दिया. असल में पप्पू यादव को मर्डर के एक मामले में कोर्ट में दोषी ठहरा दिया गया था. पप्पू यादव की मां शांति प्रिया पूर्ण‍िया से चुनाव लड़ीं, लेकिन बीजेपी कैंडिडेट उदय सिंह ने उन्हें हरा दिया. अजित सरकार मर्डर केस में पप्पू यादव कई साल जेल में भी रहे. लेकिन पटना हाईकोर्ट ने साल 2013 में उन्हें बरी कर दिया.

पढ़ने-लिखने वाले सांसद

7 मई, 2015 को उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में राष्ट्रीय जनता दल से चार साल के लिए निकाल दिया गया, जिसके बाद पप्पू यादव ने मई 2015 में अपना राजनीतिक दल खड़ा किया है जिसका नाम है जन अधिकार पार्टी. वह पहले राष्ट्रीय जनता दल से भी जुड़े रहे हैं. साल 2015 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने 40 सीटों पर अपने कैंडिडेट खड़े किए थे, हालांकि पार्टी को कुछ खास सफलता नहीं मिली.

Advertisement

पप्पू यादव साहित्य और लेखन में भी अच्छी रुचि रखते हैं. उन्होंने अपनी आत्मकथा 'द्रोहकाल के पथिक' शीर्षक से लिखी, जिसे नवंबर 2013 में जारी किया गया. इसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि साल 2001 में उनकी पार्टी के तीन सांसदों को तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने पैसा देकर एनडीए में शामिल कराया था. अपनी किताब 'जेल' में पप्पू यादव ने पटना के बेऊर जेल से लेकर दिल्ली के तिहाड़ जेल में अपने बिताए अनुभव को विस्तार से लिखा है.

तीन यादवों में कड़ा मुकाबला

पप्पू यादव इस बार फिर मधेपुरा से चुनावी मैदान में हैं. वह साल 2014 के चुनाव में शरद यादव जैसे दिग्गज को हरा चुके हैं. इस बार भी उनका मुकाबला दो यादवों से है. मधेपुरा लोकसभा सीट पर इस बार जन अधि‍कार पार्टी (लोकतांत्रिक) के पप्पू यादव उर्फ राजेश रंजन और जेडीयू के दिनेश चंद्र यादव के बीच कांटे का मुकाबला है. कभी जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे शरद यादव इस बार आरजेडी से चुनावी मैदान में हैं. बहुजन मुक्त‍ि पार्टी, राष्ट्रवादी जनता पार्टी, आम अधि‍कार मोर्चा, बलिराजा पार्टी, असली देशी पार्टी और 5 निर्दलीय भी ताल ठोंक कर चुनावी मैदान में हैं. मधेपुरा सहित बिहार की 5 सीट पर 23 अप्रैल को तीसरे फेज में मतदान होना है. लोकसभा चुनाव 2019 के तीसरे चरण में 14 राज्यों की 115 लोकसभा सीटों पर मतदान होना है.

Advertisement

मधेपुरा सीट का समीकरण

बिहार की मधेपुरा लोकसभा सीट हाईप्रोफाइल सीट मानी जाती है. आरजेडी चीफ लालू प्रसाद का ये गढ़ रहा है तो बाहुबली पप्पू यादव और शरद यादव के बीच की सियासी जंग भी यहां के वोटरों के लिए हमेशा रुचि का विषय रहता है. मधेपुरा जिला उत्तर में अररिया और सुपौल, दक्षिण में खगड़िया और भागलपुर जिला, पूर्व में पूर्णिया तथा पश्चिम में सहरसा जिले से घिरा हुआ है.

आरजेडी चीफ लालू यादव दो बार मधेपुरा सीट से लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं. मधेपुरा से 2014 में पप्पू यादव ने आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ा था और जीते थे. अब पप्पू यादव अपनी अलग पार्टी बना चुके हैं. तब शरद यादव जेडीयू के नेता थे इस बार वे आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. मधेपुरा जिला ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) को आरक्षण दिलवाने की सिफारिश करने वाले मंडल आयोग के अध्यक्ष रहे बी. पी. मंडल का पैतृक जिला है.

मधेपुरा संसदीय क्षेत्र में वोटरों की कुल संख्या 1,508,361 है. इसमें पुरुष मतदाता 790,185 है जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 718,176 है. 16वीं लोकसभा के लिए 2014 में हुए चुनाव में मधेपुरा सीट से पप्पू यादव उर्फ राजेश रंजन ने आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ा था. हालांकि, बाद में पप्पू यादव आरजेडी से अलग हो गए और उन्होंने अपनी अलग पार्टी बना ली. पप्पू यादव को 368937 वोट मिले थे. तब जेडीयू के टिकट पर शरद यादव उनके सामने थे. शरद यादव को 312728 वोट मिले थे. बीजेपी के विजय कुमार सिंह 2,52,534 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे थे.

Advertisement

इससे पहले 2009 के चुनाव में यहां से जेडीयू के टिकट पर शरद यादव जीते थे. शरद यादव को 370585 वोट मिले थे. तब उनके सामने थे आरजेडी उम्मीदवार प्रो. रविन्द्र चरण यादव जिन्हें 192964 वोट हासिल हुए थे.

चुनाव की हर ख़बर मिलेगी सीधे आपके इनबॉक्स में. आम चुनाव की ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए सब्सक्राइब करें आजतक का इलेक्शन स्पेशल न्यूज़लेटर

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement