शिमोगा‌ को BJP 'पसंद', क्या ईश्वरप्पा लगाएंगे यहां से जीत का पंच?

केएस ईश्वरप्पा को 1989 में बीजेपी की ओर से शिमोगा में उतारा गया और उस समय के स्वास्थ्य मंत्री को कड़े मुकाबले में 1,304 मतों के अंतर से हराकर वह विधानसभा पहुंचे. इस अप्रत्याशित जीत से उनकी ख्याति बढ़ गई और यहां से कुल 4 बार चुनाव जीतकर विधायक बनने में कामयाब रहे.

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केएस ईश्वरप्पा (फेसबुक) केएस ईश्वरप्पा (फेसबुक)

aajtak.in

  • बेंगलुरु,
  • 12 मई 2018,
  • अपडेटेड 9:52 AM IST

कर्नाटक की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी की ओर से केएस ईश्वरप्पा एक बड़ा चेहरा है. वह राज्य में 2012 से 2013 के बीच जगदीश शेट्टार के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे थे. वर्तमान में वह कर्नाटक विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष हैं.

आरएसएस से रहा है नाता

कर्नाटक की राजनीति में खास मुकाम बनाने वाले ईश्वरप्पा का बचपन कष्टकारी रहा था, वह अपने पिता के साथ दिहाड़ी मजदूरी किया करते थे, लेकिन मां के विरोध के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई पर ध्यान लगाया. पढ़ाई के दौरान ही वह आरएसएस से जुड़ गए. बाद में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से भी जुड़े. ईश्वरप्पा के अथक संघर्ष के कारण ही बीजेपी ने 1983 में शिमोगा में पहली बार जीत का स्वाद चखा.

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1989 में उन्हें बीजेपी की ओर से शिमोगा में उतारा गया और उस समय के स्वास्थ्य मंत्री को कड़े मुकाबले में 1,304 मतों के अंतर से हराकर वह विधानसभा पहुंचे थे. इस जीत से उनकी ख्याति बढ़ गई और यहां से कुल 4 बार चुनाव जीतकर विधायक बने. हालांकि इस दौरान उन्हें 1999 में हार का सामना भी करना पड़ा. 1992 में वह बीजेपी की राज्य ईकाई के प्रमुख बनाए गए.

2006-07 में कर्नाटक में जेडीएस और बीजेपी की साझा सरकार में मंत्री बने. फिर 2008 में राज्य में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद बीएस येदियुरप्पा की सरकार में बिजली मंत्री बने. इसके बाद सदानंद गौड़ा और जगदीश शेट्टार की बीजेपी सरकार में उपमुख्यमंत्री पद पर रहे. हालांकि 2013 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. एक बार फिर वह शिमोगा से अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, देखना होगा कि उन्हें पांचवीं बार विधानसभा जाने का मौका मिलता है या नहीं.

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