Delhi Elections 2020: फर्जी डिग्री विवाद में फंसे विधायक जितेंद्र तोमर का AAP ने काटा टिकट

Delhi Elections 2020: लगातार तीसरी बार दिल्ली में सरकार बनाने की कोशिशों में जुटी आम आदमी पार्टी ने अपना उम्मीदवार उस समय दिया जब इसके खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज करा दी गई.

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AAP नेता जितेंद्र तोमर (फाइल-PTI) AAP नेता जितेंद्र तोमर (फाइल-PTI)

आशुतोष मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 21 जनवरी 2020,
  • अपडेटेड 10:59 AM IST

  • फर्जी डिग्री विवाद के कारण कटा जितेंद्र तोमर का टिकट
  • AAP ने जितेंद्र की जगह उनकी पत्नी प्रीति को दिया टिकट

दिल्ली (Delhi Elections 2020) में सत्तारुढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) ने आपत्ति जताए जाने के बाद त्रिनगर से विधायक जितेंद्र सिंह तोमर का टिकट काट दिया है. फर्जी डिग्री विवाद के कारण जितेंद्र तोमर का टिकट काटकर उनकी पत्नी प्रीति तोमर को प्रत्याशी बनाया गया है.

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नामांकन के आखिरी दिन आज मंगलवार को आम आदमी पार्टी ने जितेंद्र तोमर का टिकट काट दिया. इनकी जगह उनकी पत्नी प्रीति तोमर ने आज ही अपना नामांकन दाखिल भी कर दिया.

दिल्ली हाई कोर्ट ने पिछले दिनों फर्जी डिग्री विवाद के कारण जितेंद्र तोमर के 2015 के विधानसभा चुनाव को रद्द कर दिया था. इसके बावजूद आम आदमी पार्टी ने जितेंद्र तोमर को इस बार भी प्रत्याशी बनाया. इसके खिलाफ सोमवार को ही बीजेपी चुनाव आयोग पहुंची थी.

इससे पहले सोमवार को दिल्ली की त्रिनगर सीट से आम आदमी पार्टी प्रत्याशी जितेंद्र सिंह तोमर के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ओर से दायर शिकायत में कहा गया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने जितेंद्र सिंह तोमर की डिग्री को फर्जी पाया था, लेकिन आम आदमी पार्टी ने फिर से त्रिनगर से जितेंद्र सिंह तोमर को उम्मीदवार बना दिया.

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बीजेपी प्रतिनिधिमंडल में विजय गोयल के अलावा हरदीप सिंह पुरी और हरीश खुराना शामिल थे जिन्होंने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई.

मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा

जितेंद्र सिंह तोमर 2015 में त्रिनगर से आम आदमी पार्टी के विधायक चुने गए थे. इस बार भी आम आदमी पार्टी ने उन्हें त्रिनगर सीट से ही मैदान में उतारा था. केजरीवाल सरकार में कानून मंत्री रहे जितेंद्र तोमर को 2016 में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था. उन पर आरोप था कि उनकी डिग्री फेक है.

फर्जी डिग्री विवाद बढ़ने पर 2015 में तोमर को मंत्री पद से तब इस्तीफा देना पड़ा था. बाद में वह जमानत पर रिहा हो गए थे.

जितेंद्र तोमर पर 2015  के चुनाव में नामांकन दाखिल करते समय जाली प्रमाणपत्र पेश करने का भी आरोप है. जांच के दौरान तोमर ने कथित तौर पर पुलिस को बताया था कि उनके भाई ने उन्हें फर्जी डिग्री प्राप्त करने में मदद की थी.

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