बिहार की राजापाकड़ विधानसभा सीट पर इस बार चुनावी परिणाम बदल गए हैं और कांग्रेस उम्मीदवार प्रतिमा कुमारी ने जेडीयू को चारो खाने चित कर दिया है. उन्होंने जेडीयू के महेंद्र राम को 1796 वोटों के अंतर से हरा दिया. उनकी जीत में सबसे अहम भूमिका लोजपा उम्मीदवार धनंजय कुमार ने निभाई जिन्हें 24 हजार से ज्यादा वोट मिले. बिहार के चुनावी राजनीति में राजापाकड़ विधानसभा सीट नई है और यहां सिर्फ दो बार चुनाव हुए हैं. वर्तमान में आरजेडी नेता शिवचंद्र राम यहां से विधायक हैं. बिहार की राजापाकड़ विधानसभा सीट पर इस बार 3 नवंबर को वोट डाले गए, यहां कुल 55.73% मतदान हुआ.
इस बार के मुख्य उम्मीदवार
राजनीतिक पृष्ठभूमि
परिसीमन के बाद अस्तित्व में आए राजापाकड़ विधानसभा सीट पर 2020 विधानसभा चुनाव से पहले तक हुए दो बार के चुनावों में एक बार आरजेडी और एक बार जेडीयू को जीत हासिल हुई है.
साल 2010 में यहां से जेडीयू नेता संजय कुमार ने लोजपा के गौरीशंकर पासवान को 10 हजार वोटों से हराया था. हालांकि 2015 में जेडीयू और आरजेडी के एक साथ आने के कारण यह सीट आरजेडी के खाते में गई और शिवचंद्र राम आरजेडी के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे. इस दौरान उन्होंने लोजपा के राम नाथ रमन को करीब 15 हजार वोटों के अंतर से हराया था.
समाजिक ताना-बाना
बिहार के वैशाली जिले के तहत आने वाला राजा पाकर विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. यह हाजीपुर (एससी) लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. 2011 की जनगणना के अनुमान के अनुसार, यहां की आबादी करीब 373132 है. इसमें 100 फीसदी लोग ग्रामीण हैं. वहीं अनुसूचित जाति (एससी) की बात करें तो इस सीट पर एससी लोगों की आबादी 22.41 फीसदी है. यही कारण है कि इस सीट पर चुनाव में उतरने वालों की नजर एससी वोट बैंक पर भी रहती है.
2015 का जनादेश
2015 के विधानसभा चुनावों में यहां के 55.39 फीसदी वोटर्स ने वोट डाले थे. आरजेडी विधायक शिवचंद्र राम को 2015 के चुनाव में 61251 वोट मिले थे और राम नाथ रमन के खेमे में 46096 वोट गिरे थे. वोट परसेंटेज देखें तो पिछले विधानसभा चुनाव में आरजेडी के पक्ष में 45 फीसदी वोटिंग हुई थी, वहीं लोजपा के पक्ष में 34 फीसदी वोटिंग हुई थी.
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