पश्चिम बंगाल में चुनावी तैयारियों के बीच ड्राफ्ट मतदाता सूची (Draft Electoral Roll) के प्रकाशन को 17 दिन बीत चुके हैं, लेकिन राजनीतिक दलों की सक्रियता को लेकर अब बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं. निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इतने दिनों के अंतराल में अब तक केवल 8 अपीलें ही दाखिल की गई हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि किसी भी अयोग्य व्यक्ति के नाम को लेकर अब तक एक भी आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई है.
निर्वाचन आयोग के अधिकारियों का कहना है कि ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद राजनीतिक दलों, बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) और आम मतदाताओं को नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन के लिए पर्याप्त समय और अवसर दिया गया है. इसके बावजूद अपीलों की संख्या बेहद कम रहना कई सवाल खड़े करता है.
आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, प्राप्त आठ अपीलों में से तीन अपीलें सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की ओर से दाखिल की गई हैं. वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीएम की ओर से दो अपीलें आई हैं. इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), फॉरवर्ड ब्लॉक और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने एक-एक मतदाता का नाम जोड़ने के लिए अपील दाखिल की है.
दिलचस्प बात यह है कि राज्य में बूथ लेवल एजेंटों की संख्या काफी अधिक है. पश्चिम बंगाल में कुल 2 लाख 7 हजार 1 बूथ लेवल एजेंट सक्रिय हैं. इनमें सबसे ज्यादा 77 हजार 91 बीएलए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के हैं, जबकि मुख्य विपक्षी दल भाजपा के 60 हजार 186 बीएलए राज्यभर में तैनात हैं. सीपीएम के 49 हजार 79 और कांग्रेस के 18 हजार 733 बूथ लेवल एजेंट हैं. इसके अलावा फॉरवर्ड ब्लॉक के 1,885 और बहुजन समाज पार्टी के सबसे कम 21 बीएलए हैं.
इतनी बड़ी संख्या में बीएलए होने के बावजूद ड्राफ्ट मतदाता सूची पर न के बराबर आपत्तियां सामने आना आयोग के लिए भी चौंकाने वाला है. निर्वाचन आयोग का कहना है कि ड्राफ्ट सूची की जांच करना राजनीतिक दलों और उनके एजेंटों की अहम जिम्मेदारी होती है, ताकि चुनाव से पहले मतदाता सूची पूरी तरह शुद्ध और त्रुटिरहित बनाई जा सके.
आयोग ने एक बार फिर सभी दलों और मतदाताओं से अपील की है कि वे ड्राफ्ट मतदाता सूची की गहन जांच करें और यदि कोई त्रुटि हो तो तय समय-सीमा के भीतर अपील दर्ज कराएं, ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित किए जा सकें.
संजय शर्मा