पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पूरी तरह से मिशन मोड में नजर आ रही है. बीजेपी ने राज्य के 82 निर्वाचन क्षेत्रों में करीब 71 हजार बूथों पर अपनी बूथ स्तर की संरचना को मजबूत कर लिया है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, एसआईआर (एसोसिएशन ऑफ इनफॉर्मेशन एंड रिसर्च) प्रक्रिया के बाद बूथों की संख्या बढ़कर 93 हजार तक पहुंच सकती है, जिससे चुनावी स्तर पर संगठन को और ताकत मिलेगी.
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और संगठन से जुड़े कार्यकर्ता आने वाले दिनों में अपने पुराने कैडर के घर जाकर उनसे संपर्क करेंगे. इसके साथ ही, राज्य में हिंसा से प्रभावित हुए बीजेपी कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात की जाएगी, ताकि संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान की जा सके.
इस बार बीजेपी की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. पार्टी ने साफ कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और वाम दलों के दागी नेताओं को बीजेपी में शामिल नहीं किया जाएगा. साथ ही, टॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री के बड़े चेहरों पर दांव लगाने से भी पार्टी इस बार परहेज कर रही है.
2021 के चुनावों में अन्य दलों और फिल्म-टीवी सितारों को टिकट देने का नतीजा पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हुआ था. इसी आधार पर बीजेपी इस बार पूर्ण रूप से कैडर आधारित राजनीति पर जोर दे रही है.
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बीजेपी पूर्वांचली, बिहारी, मारवाड़ी और देश के अन्य हिस्सों से आए मतदाताओं तक सीधे पहुंचने की योजना बना रही है. उनका परिवारों से संवाद कर चुनाव में समर्थन जुटाने का प्रयास किया जाएगा. इसके अलावा, राज्य के फुटबॉल क्लबों में भी पार्टी अपनी पहुंच मजबूत करने की कोशिश में है.
बीजेपी इस बार नकारात्मक प्रचार से दूरी बनाकर सकारात्मक, मुद्दा आधारित अभियान पर फोकस करेगी. इस सिलसिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 17 और 18 जनवरी को मालदा और हावड़ा में प्रस्तावित रैलियां चुनावी तैयारियों का अहम हिस्सा मानी जा रही हैं. ये रैलियां बीजेपी की पकड़ मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी.
हिमांशु मिश्रा