बैग के बोझ से टेढ़ी हो रही बच्चों की गर्दन, दर्द कर रही पीठ, सर्जन ने दिए सुझाव

अगर आपका बच्चा भी भारी स्कूल बैग की वजह से गर्दन और पीठ दर्द से परेशान है तो जानें क्या है उपाय. ऑर्थोपेडिक सर्जन हिमांशु त्यागी ने दी ये सलाह.

Advertisement
प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 जनवरी 2020,
  • अपडेटेड 6:36 PM IST

  • भारी स्कूल बैग के कारण बच्चों की गर्दन और पीठ में हो रहा दर्द
  • दिल्ली राज्य सरकार ने तय कर रखा है बच्चों के बैग का वजन 

अर्पिता गुड़गांव के एक प्राइवेट स्कूल में 7वीं में पढ़ती है. पिछले एक साल से उसकी पीठ और गर्दन में भारी दर्द हो रहा है. उसके पैरेंट्स कई डॉक्टरों से मिले. बच्ची को एक्स-रे, एमआरआई जैसी कई जाचों से गुजरना पड़ा लेकिन समस्या बरकरार रही. फिलहाल 2 महीने से उसकी फिजियोथिरेपी चल रही है. 

Advertisement

ऐसी परेशानी केवल 7वीं में पढ़ने वाली अर्पिता की नहीं है, बल्कि स्कूल के कई स्टूडेंट्स पीठ दर्द और गर्दन दर्द से परेशान हैं. भारी स्कूल बैग के कारण 5 से 15 साल के बीच के कई छात्रों को दिक्कत हो रही है. शुरू में दर्द का कारण खराब मुद्रा या मांसपेशियों की कमजोरी माना जाता है, लेकिन असली कारण भारी स्कूल बैग है.

सीनियर कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक सर्जन हिमांशु त्यागी ने बताया "स्कूल जाने वाले लगभग 40% छात्रों को पीठ और गर्दन के दर्द की परेशानी है. भारी स्कूल बैग गर्दन की मांसपेशियों को खींचता है. गर्दन के दर्द के कारण रीढ़ की हड्डी के पीछे तकलीफ होती है. यह दर्द पढ़ाई के साथ-साथ खेल में भी बच्चे का प्रदर्शन खराब कर सकता है. इससे बच्चे का संपूर्ण विकास प्रभावित हो सकता है और उसका मनोबल नीचे आ सकता है."

Advertisement

तय किया गया है छात्रों के बैग का वजन

बच्चों की उम्र के आधार पर स्कूल बैग के वजन को सीमित करने के लिए कुछ राज्य सरकारों ने हाल ही में नियम बनाए हैं. ये नियम विभिन्न अध्ययनों पर आधारित थे जिनमें बताया गया था कि भारी स्कूल बैग ले जाने से बच्चे की रीढ़ की हड्डी प्रभावित हो सकती है. यहां तक कि छात्र स्थायी विकलांगता के शिकार भी हो सकते हैं.

इस संबंध में ओडिशा और दिल्ली राज्य सरकारों द्वारा सराहनीय कदम उठाए गए हैं. उन्होंने स्कूल बैग के वजन को बच्चे के शरीर के वजन के 10% तक सीमित करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं. साथ ही स्कूल अधिकारियों को उचित टाइम टेबल बनाने का निर्देश दिया गया है. जिसमें प्रति विषय पुस्तकों की संख्या को प्रतिबंधित करने को कहा गया है.

कक्षा 9 वीं के छात्र देवांश कहते हैं, "हम घर पर एक किताब भूल जाने से डरते हैं, शिक्षकों द्वारा सजा और डांट के डर से हम सभी किताबों को स्कूल लाने के लिए मजबूर होते हैं."

दिल्ली राज्य सरकार के अनुसार

कक्षा 1 और 2 - 1.5 किलोग्राम

कक्षा 3,4, 5 -3  किलोग्राम

कक्षा 6,7-  4 किलोग्राम

कक्षा 8,9 - 4.5 किलोग्राम

कक्षा 10 वीं से ऊपर - अधिकतम 5 किलोग्राम

Advertisement

अभिवावक पढ़ें ये नियम

1) टाइम टेबल का सख्ती से पालन करें

2) अगर स्कूल छात्रों से हर रोज पूरे सेलेबस की किताबें लाने को कहते हैं तो आपत्ति दर्ज कराएं.

3) रीढ़ को मजबूत करने के लिए स्कूल में नियमित फिजिकल ट्रेनिंग /एक्सरसाइज / स्पोर्ट्स पीरियड हो

4) कक्षा में प्रत्येक छात्र को स्कूल में ही एक्स्ट्रा किताबें रखने के लिए लॉकर उपलब्ध कराया जाए.

5) अगर बच्चे को भारी बैग लेकर क्लास तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां चढ़नी पड़ें तो लिफ्ट की व्यवस्था हो.

कैसे लेकर चलें स्कूल बैग

● स्कूल बैग को हमेशा दोनों कंधों के ऊपर पहना जाना चाहिए (रीढ़ की हड्डी के तनाव को 30% तक कम कर देता है. जबकि यह छात्र अक्सर बैग को एक कंधे पर पहनते हैं)

● स्कूल बैग पीठ पर बहुत टाइट या बहुत ढीला नहीं होना चाहिए. यह रीढ़ की हड्डी को तटस्थ स्थिति में लोड करने के लिए बस पर्याप्त तंग होना चाहिए. (स्कूल बैग पहनते समय बच्चे को आगे झुकने या पीछे की ओर झुकने की कोई आवश्यकता नहीं होनी चाहिए).

● भारी वस्तुओं को बच्चे की पीठ के करीब रखें और साइड जेब में हल्का सामान रखें.

● स्कूल बैग में चौड़ी पट्टियां होनी चाहिए.

● अधिक लंबे स्कूल बैग हमेशा चौड़े बैग की तुलना में पसंद किए जाते हैं, क्योंकि लंबे बैग में अधिक भार आ जाता है.

Advertisement

● स्कूल बैग ऊपर से गर्दन और कंधे क्षेत्र के करीब शुरू करना चाहिए.

● यदि किसी विशेष दिन पर, बच्चे को स्कूल में अतिरिक्त वजन ले जाना है. वजन के साथ स्कूल बैग को भरने के बजाय हाथ में भारी वस्तुओं को पकड़ना बेहतर होता है. (इससे रीढ़ की हड्डी में ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा)

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement