ऑनलाइन एजुकेशन है वक्त की मांग, स्कूल की ये चीजें मिस कर रहे बच्चे

ऑनलाइन लर्निंग के इस दौर में इंडिया टुडे के शो न्यूजट्रैक में क्लाउड रीडिफाइनिंग द क्लासरूम पर चर्चा की गई. जानें, कैसे देश में चल रही है ऑनलाइन क्लास और किन चीजों को मिस कर रहे हैं छात्र.

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प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 अप्रैल 2020,
  • अपडेटेड 1:56 PM IST

इंडिया टुडे के शो न्यूजट्रैक में 'क्लाउड रीडिफाइनिंग द क्लासरूम' पर चर्चा की गई, जिसमें एजुकेशन से संबंधित बातें हुईं. इसपर edx के सीईओ प्रो अनंत अग्रवाल, Coursera के सीईओ जेफ मैगियोन्क्लेडा और दिल्ली के वसंत वैली स्कूल की प्रिंसिपल रेखा कृष्णन ने अपनी बात रखी. इंडिया टुडे और आजतक के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल ने सभी से ऑनलाइन एजुकेशन से जुड़े सवाल पूछे.

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बता दें, कोरोना वायरस प्रकोप के कारण देश में लॉकडाउन लागू है. इस दौरान सभी स्कूल-कॉलेज भी बंद हैं और छात्रों को ऑनलाइन क्लास के माध्यम से पढ़ाई करवाई जा रही है.

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वसंत वैली स्कूल की प्रिंसिपल रेखा कृष्णन ने कहा कि जिस तरह से कोरोना का प्रकोप है और अगले कुछ महीनों तक इसके देश में रहने की आशंका है और ऐसे में ऑनलाइन लर्निंग अहम हो जाती है, क्योंकि इससे बच्चा घर बैठे भी सीख सकता है. हम लगातार छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई में मदद कर रहे हैं. इसी दौरान शिक्षक, छात्र, अभिभावक भी अच्छा काम कर रहे हैं.

शुरुआत में ऑनलाइन एजुकेशन चुनौती भरा काम था. हमें बच्चों के साथ शिक्षकों को भी अवेयर करना था. काफी हद तक ऑनलाइन एजुकेशन कंट्रोल में है. उन्होंने कहा, तकनीक का सही इस्तेमाल किया जाए तो क्लासरूम जैसा ही रिजल्ट ऑनलाइन पढ़ने वाले बच्चे दे सकते हैं.

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स्कूल से जुड़ी है भावना

ऑनलाइन ही लर्निंग का भविष्य हो सकती है, लेकिन स्कूल में छात्रों और शिक्षकों के बीच में जो भावनात्मक जुड़ाव होता है उसे हम किसी से छीन नहीं सकते.

क्लास की बातें, मजाक करना, दोस्तों का साथ, पढ़ाई का माहौल, शिक्षकों से सवाल आदि चीजें स्कूल के दौरान होती हैं, जो छात्रों को याद आ रहा होगा. लेकिन हम प्रार्थना करते हैं कि सभी चीजें ठीक हो जाएं और छात्र स्कूल जाना शुरू करें.

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अनंत अग्रवाल ने बताया कि 15 मार्च के पहले दुनिया की 3 फीसदी आबादी ही ऑनलाइन पढ़ाई कर रही थी और 15 मार्च के बाद 100 फीसदी दुनिया ऑनलाइन की ओर बढ़ गई. ये बहुत बड़ा बदलाव है नई तकनीक का. इसी के साथ ये कहना गलत नहीं होगा कि कोरोना वायरस के कारण छात्रों का पढ़ाई करने का तरीका पूरी तरह से बदल गया है.

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