आंकड़ों की बाजीगरी में मशीन को मात देने वाली शंकुतला देवी को जन्म आज ही के दिन हुआ था. उन्हें 'मेंटल केलकुलेटर' और 'ह्यूमन कंप्यूटर' के नाम जाना जाता है. उन्होंने एक लेखिका के रूप में कई किताबें लिखी, जिनमें कई उपन्यास भी शामिल है. साथ ही उन्होंने गणित और ज्योतिष पर बहुत सी किताबें भी लिखीं.
जानते हैं शंकुतला देवी के बारे में...
शकुंतला देवी का जन्म 4 नवंबर 1929 को हुआ था. उनके पिता सर्कस में काम करते थे. वे कैननबॉल और रस्सियों से जुड़ी कलाबाजियां करते थे. एक बार जब वे अपनी बेटी के साथ कार्ड खेल रहे थे तब उन्हें अपनी बेटी की अद्भुत गणना क्षमता का अंदाजा हुआ. शकुंतला ने अपने कार्ड खेलने के बजाय पत्तों को याद करने की क्षमता को लेकर अपने पिता को आश्चर्य में डाल दिया था.
शकुंतला ने महज छह साल की उम्र में पहली बार लोगों के बीच मैसूर विश्विद्यालय में अपनी गणना क्षमता का प्रदर्शन किया. इसके कुछ समय बाद ही उन्होंने अन्नामलई विश्वविद्यालय में अपनी क्षमता का लोहा मनवाया. जिसके बाद वह गणित की दुनिया में छा गई.
उनकी किताब 'The world of homosexuals' भारत में होमोसेक्सुअल की पहली किताब मानी जाती है.
उन्होंने सिर्फ 50 सेकंड में 201 डिजिट के एक नंबर का 23 स्क्वेयर रुट कैलकुलेट कर लिया था.
सिर्फ 28 सेकेंड में 76,86,36,97,74,870 को 24,65,09,97,45,779 से गुणा कर उन्होंने अपना नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करा लिया था.
आपको जानकर हैरानी होगी कि जिन्हें दुनिया 'ह्यूमन कंप्यूटर' और 'मेंटल केलकुलेटर' के नाम से जानती है. उन्हें स्कूल की पढ़ाई को बीच में छोड़ना पड़ा. क्योंकि सर्कस में काम करने वाले उनके पिता 2 रुपये फीस नहीं चुका पाए थे.
फन विद नंबर्स, ऐस्ट्रोलॉजी फॉर यू, पजल्स टू पजल यू और मेथाब्लिट जैसी किताबें लिखने वाली शकुंतला देवी का नाम गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है.
शकुंतला देवी को 2013 में बंगलुरु के दवाखाने में दाखिल किया गया. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार किडनी और दिल में भारी कमजोरी के चलते 21 अप्रैल 2013 को उनकी मृत्यु हो गई. उस समय उनकी आयु 83 साल की थी.
शकुंतला देवी का कहना था, 'गणित के बिना आप कुछ नहीं कर सकते. आपके चारों तरफ गणित है. सभी कुछ नंबर में है.
अनुज कुमार शुक्ला