5 Signs You're Highly Sensitive and Strong: आप अपने जीवन में रोजाना बहुत से लोगों से मिलते होंगे. रोजाना अलग-अलग लोगों से मिलने पर आपने ये देखा होगा कि लोगों की पर्सनैलिटी कितनी अलग-अलग होती हैं. यहां तक की आप अगर अपने दोस्तों के ग्रुप को भी देखंगे तो पाएंगे कि हर एक व्यक्ति की पर्सनैलिटी अलग होती है. कई लोग बहुत संवेदनशील होते हैं तो कुछ बहुत स्ट्रॉन्ग्स. कुछ लोग दूसरों से बात करने बिल्कुल नहीं कतराते तो कुछ लोगों को नए लोगों के साथ घुलने-मिलने में समय लगता है. आज हम आपको ऐसी पांच आदतें बताने जा रहे हैं, जो एक सेंसिटिव के साथ-साथ स्ट्रॉन्ग व्यक्तियों की पहचान होती है. जानिए आपमें ऐसी कितनी आदते हैं.
आप सही के साथ खड़े होते हैं: अगर आप जीवन में सही के लिए खड़े होते हैं और अपनी बात रखते हैं, तो आप उन लोगों में से हैं जो सेंसिटिव होने के साथ-साथ स्ट्रॉन्ग पर्सनैलिटी के होते हैं. जब आप किसी के साथ कुछ गलत होते देखते हैं तो आप उसके खिलाफ आवाज उठाते हैं. मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक, आप ऐसा इसलिए कर पाते हैं क्योंकि ज्यादा सेंसिटिव होने के कारण आप दूसरे व्यक्ति की परेशानी से खुद को जोड़ पाते हैं. आप समझ पाते हैं कि उस व्यक्ति पर क्या बीत रही होगी. स्ट्रॉन्ग होने के चलते आप उस समस्या को समझ कर सही का साथ देते हैं.
आप लोगों के बीच सुलह करवा लेते हैं: मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जो लोग दूसरों के बीच आराम से सुलह करवा लेते हैं, वो लोग सेंसिटिव होने के साथ-साथ स्ट्रॉन्ग होते हैं. दरअसल, सेंसटिव नेचर होने के कारण आप दोनों गुटों की बात को बेहतर समझ पाते हैं और स्ट्रॉन्ग पर्सनैलिटी की वजह से आप उनकी बातों को एक-दूसरे के समक्ष रख पाते हैं. इसलिए आप दो लोगों में आराम में मध्यस्ता करवा सकते हैं.
आप बहुत सोच-समझ कर निर्णय लेते हैं: सेंसिटिव और स्ट्रॉन्ग व्यक्तियों की पहचान होती है कि वो कभी किसी परिस्थिति में निर्णय लेने से पहले बहुत सोचते और समझते हैं, उसके बाद किसी निष्कर्ष पर पहुंचते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ऐसे लोग कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने आसपास के लोगों के बारे में भी विचार करते हैं. हालांकि, आप किसी के पर्सनल एजेंडा से अपने निर्णय को प्रभावित नहीं होने देते.
आप हमेशा सच बोलते हैं: अगर आप कभी भी लोगों के सामने सच बोलने से नहीं डरते तो आप सेंसिटिव होने के साथ-साथ स्ट्रॉन्ग पर्सनैलिटी के व्यक्ति हैं. आप किसी को झूठे दिलासे नहीं देते, बल्कि बेहतर तरीकों से शब्दों का चयन करके आप सामने वाले को सच बोलते हैं.
आप दूसरों की समस्या को सुनते हैं: जब कोई व्यक्ति आपसे अपनी परेशानियों के बारे में बात करता है तो आप सिर्फ सुनने के लिए उसे नहीं सुनते, बल्कि उसकी बातों को समझने के लिए उसे सुनते हैं. ऐसा आप इसलिए करते हैं क्योंकि आपको पता है कि जब आप किसी व्यक्ति की परेशानियों को सुनते हैं तो सामने वाले को कितनी राहत मिलती है.
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