घटना के बाद बेसमेंट क्लासेज की एक अलग इमेज बन गई है! जानिए- व‍िकास द‍िव्यकीर्त‍ि ऐसा क्यों बोले

राजेंद्र नगर में एक कोचिंग सेंटर में तीन स्टूडेंट्स की मौत के बाद एमसीडी ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए कई अवैध और बेसमेंट में चल रहे कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया. इसमें विकास दिव्यकीर्ति की दृष्टि आईएएस कोचिंग भी शामिल है. इस हादसे को लेकर विकास दिव्यकीर्ति ने अब खुलकर बात की है.

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Vikas Divyakirti Vikas Divyakirti

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 2:30 PM IST

जब यूपीएससी के मामले में बड़े शिक्षाविदों को याद किया जाता है तो उसमें एक नाम विकास दिव्यकीर्ति का भी लिया जाता है. सिविल सर्विस की तैयारी कर रहे कैंडिडेट्स विकास दिव्यकीर्ति को अपने आर्दश के रूप में देखते हैं. शायद इसीलिए दिल्ली के ओल्ड नगर कोचिंग हादसे में विकास दिव्यकीर्ति की चुप्पी ने सभी को परेशान किया था. तीन दिन की इस चुप्पी में बच्चे सवाल करते रहे कि शिक्षाविद विकास दिव्यकीर्ति कहा हैं और छात्रों के हित के लिए अब बात क्यों नहीं कर रहे. तीन दिन बाद विकास दिव्यकीर्ति ने अपनी चुप्पी तोड़ी और राजेंद्र नगर हादसे पर बात की है.

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न्यूज ऐजंसी ANI को दिए हुए इंटरव्यू में विकास दिव्यकीर्ति ने बताया कि कोचिंग हादसे को लेकर वो किसे जिम्मेदार ठहराते हैं और उनकी खुदकी कोचिंग सील होने पर उनकी राय क्या है. विकास दिव्यकीर्ति से जब पूछा गया कि बच्चे आपसे नाराज हैं, उसपर आप क्या कहना चाहेंगे तो उन्होंन बोला कि 'हमसे चूक हुई है, यह कहा जा सकता है लेकिन ये चूक ऐसी है, जिसमें हमारी नीयत खराब नहीं थी, लेकिन हां नियम स्तर पर चूक हुई है. विचित्र बात ये है कि दिल्ली में कोचिंग संस्थानों की संख्या कम से कम एक हजार तो होगी, ज्यादा भी हो सकती हैं. जो नॉर्म हैं फायर एनओसी, एजुकेशन बिल्डिंग, मेरा अनुमान है कि इन हजारों से एक के पास भी यह एनओसी नहीं होगी.

तीन दिन क्यों चुप रहे विकास दिव्यकीर्ति?

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विकास दिव्यकीर्ति ने आगे कहा कि जब कोई हादसा होता है तो मोटी-मोटी चीजें सामने आती हैं कि फायर एनओसी नहीं है या जो भी, फिर जनता का आक्रोश फट सकता है. इसके पीछे की परिस्थितियां क्या हैं यह सोचने या समझने के लिए धैर्य चाहिए. तो मैं असल में तीन दिन यह चाह रहा था कि पहले सारी स्थितियां सामने आ जाएं, 1-2 दिन तक तो यही स्पष्ट नहीं हो रहा था कि कितने बच्चे थे. धीरे-धीरे चीजें स्पष्ट हुईं. 

बेसमेंट सील होने पर क्या बोले शिक्षाविद?

जहां तक बात है हमारे बेसमेंट की. एक मुखर्जी नगर में है, करोल बाग में 4-5 बिल्डिंग हैं उनमें से एक बिल्डिंग की बेसमेंट सील हुई है. करोल बाद में जो बेसमेंट है, वो अप्रूव्ड बेसमेंट है. कर्मशियल बेसमेंट है. इसकी एनओसी में लिखा हुआ है कि इसमें ऑफिस चलाया जा सकता है और इसमें वाकई में ऑफिस चल रहा था. लेकिन अभी एमसीडी पर दबाव  था तो उन्होंने बिना विचार किए सब सील किया है.

नेहरू विहार में जो बेसमेंट है, जिसको लेकर काफी शोर हुआ. जब बेसमेंट वाला सीन हुआ है, तबसे सबके मन में बेसमेंट की एक इमेज बन गई है. छवि ऐसी कि एक छोटी सी बेसमेंट है उसमें कुछ बच्चे बैठे हुए हैं, एक ही दरवाजा है अगर वो बंद हो जाएगा तो क्या होगा, एकदम जायज बात है. जो नेहरू विहार की बेसमेंट थी वो किसी घर की बेसमेंट नहीं थी, वो एक कर्मशियल मॉल है उसकी बेसमेंट है. बहुत बड़े आकार की बेसमेंट है. उसमें एक दो नहीं, सात एग्जिट हैं. यह सभी आपस में कनेक्टेड हैं. हर क्लासरूम में मैप लगा हुआ है कि इमरजेंसी में कहां-कहां से बाहर निकला जा सकता है. हमारे स्टाफ के जितने भी मेंबर्स हैं, उन सबकी ट्रेनिंग लगातार होती है. 

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दृश्टि IAS कोचिंग को लेकर क्या है विवाद?

मैं अपने होशोहवास में यह बात कह रहा हूं कि हमारा बेसमेंट दिल्ली के सबसे सेफ इंफ्रास्ट्रक्टचर में से एक है. बिल्डिंग हाल ही में बनी है और हम उसके मालिक नहीं है, हम वहां रेंट पर हैं. जब हमने मालिक से पूछा तो उन्होंने कई चीजें बताई, जिनको लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई होती है. इसमें डीडीए और एमसीडी के बीच में कई कन्फ्यूजन हैं, कई चिट्ठी एमसीडी ने लिखी हैं और कई चिट्ठी डीडीए ने. 28 अगस्त को इसपर फैसला आने वाला था लेकिन अब दोबारा सुनवाई है. पिछले एक साल में हमने क्लासरूम में जा जाकर सभी स्टूडेंट्स को बताया कि हो सकता है कि हमें इसकी परमिशन ना मिले तो हम शिफ्ट करेंगे. उनसे हमनें ऑनलाइन एक फॉर्म भरवाया कि उस केस में वे कहां जाना पसंद करेंगे. करोल बाग या कहीं और. हाईकोर्ट में अभी केस चल रहा है, जैसे ही कोई निष्कर्ष आएगा, हम उस पर बात करेंगे. 

हमें ऐसा लगता था कि फायर की चिंता ज्यादा है. ऐसा हुआ भी था कि गुजरात सूरत में ऐसी घटना हो चुकी है. दिल्ली में जितनी गर्मी इस साल थी, हम प्रार्थना करते थे कि इस तरह की गर्मी में किसी कोचिंग संस्थान में हादसा ना हो जाए. रात दिन एसी चल रहे थे, उतना लोड उठाना काफी मुश्किल होता है. दिल्ली के अधिकांश इंस्टीट्यूट में केवल एक एंट्री और एक एग्जिट है. सबसे बड़ी चिंता थी कि उसी रास्ते पर बिजली के मीटर लगे हुए हैं. जो पिछले साल दिल्ली की एक कोचिंग संस्था में आग लगी, उसमें एक ही रास्ता था. उसमें मीटर था. ऐसे में बच्चों को ऊपर जाना पड़ा लेकिन धुआं ऊपर की ओर उठा. बच्चे ऊपर भागे और तब तक कुछ बच्चे कूद भी चुके थे. मूल खतरा आग से होता है और दिल्ली में जब गर्मी पड़ती है तो विशेष रूप से एक महीना दिक्कत रहती है. इस साल हमने पहली बार ऐसा किया कि गर्मियों में बच्चों को एक महीने की छुट्टियां दे दीं. ऑनलाइन क्लास चलीं. कहीं कोई हादसा ना हो जाए. हमारे जेहन में कभी पानी भरने की बात नहीं आई थी. 

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