NEET एग्जाम पर अभ‍िनेता कमल हासन बोले, 'ये गैर बराबरी वाला एक किलर एग्जाम'

नीट के प्रभाव पर सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एके राजन की रिपोर्ट का समर्थन करते हुए कमल हासन ने एक बयान जारी कर नीट परीक्षा को सामाजिक न्याय और समानता के खिलाफ बताया.

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अभ‍िनेता कमल हासन अभ‍िनेता कमल हासन

aajtak.in

  • चेन्नई ,
  • 22 सितंबर 2021,
  • अपडेटेड 5:01 PM IST

तम‍िलनाडु राज्य में लगातार नीट परीक्षा को लेकर चर्चा हो रही है. यहां सरकार की ओर से गठ‍ित कमेटी ने इस परीक्षा पर कई आंकड़े दिए हैं. अब इस परीक्षा पर  सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एके राजन की रिपोर्ट का समर्थन करते हुए कमल हासन ने एक बयान जारी कर नीट परीक्षा को सामाजिक न्याय और समानता के खिलाफ बताया. 

कमल हासन ने कहा कि नीट गरीब या ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले मेडिकल उम्मीदवारों के सपनों को चकनाचूर कर देता है. नीट के बाद मेडिकल पाठ्यक्रमों में शामिल होने वाले छात्रों का प्रतिशत 14.44 फीसदी से गिरकर 1.7% हो गया है और यह दर्शाता है कि नीट परीक्षा सामाजिक न्याय के खिलाफ है. 

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कमल हासन ने भी एके राजन की रिपोर्ट के निष्कर्ष का समर्थन करते हुए कहा कि केवल सीबीएसई छात्रों ने परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन किया है और 90% ने कोचिंग नहीं ली है. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में देश का सबसे बड़ा चिकित्सा ढांचा है और अगर नीट जारी रहा तो यह खत्म हो जाएगा. कमल हासन ने यह भी कहा कि NEET किसी की मातृभाषा के खिलाफ मानसिकता पैदा कर रहा है. इसे न केवल तमिलनाडु बल्कि पूरे भारत से हटा दिया जाना चाहिए. 

पिछले हफ्ते आया ये विधेयक 

राज्य सरकार द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक पिछले हफ्ते विधानसभा में एक विधेयक पेश किया था, जिसमें तमिलनाडु के छात्रों को केंद्रीकृत मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) से छूट देने की मांग की गई थी. नीट के शहरी और अमीर आवेदकों के बारे में समिति ने कहा कि मुख्य रूप से विशेषाधिकार प्राप्त समुदायों से डॉक्टरों और शिक्षण संकायों की एक पीढ़ी बनी है. इसमें समृद्ध, मलाईदार, शहरी शैली जो जमीनी वास्तविकताओं से बहुत दूर हैं, उन्हें नीट जैसी परीक्षाओं में ज्यादा मौके मिले. 

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बता दें कि विधेयक में राज्य के मेडिकल स्टूडेंट्स को नीट से स्थायी छूट देने के लिए राष्ट्रपति से सहमति मांगी गई थी. इसमें बीजेपी को छोड़कर सभी पार्टियों ने सदन में इस विधेयक का समर्थन किया था. विधेयक में 12वीं के मार्क्स के आधार पर मेडिकल कोर्सेज में एडमिशन का सुझाव दिया गया था. 

समिति में आए ये आंकड़े 

समित‍ि की रिपोर्ट के हवाले से यह बात भी सामने आई है कि NEET के कार्यान्वयन के बाद फर्स्ट जेनरेशन के ग्रेजुएट्स में प्रवेश में 9.74%, ग्रामीण उम्मीदवारों में 12.1% और प्रति वर्ष 2.5 लाख रुपये से कम माता-पिता की आय वाले उम्मीदवारों में 10.45 फीसदी की गिरावट आई है.स्टडी में यह भी पाया गया कि NEET के बाद की अवधि में विज्ञान स्ट्रीम के छात्रों के प्रतिशत में 43.03% से 35.94% की गिरावट आई है.

 

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