केवल ट्यूशन फीस ही मांग सकते हैं स्‍कूल, टीचर्स और अन्‍य स्‍टाफ को भी देनी होगी सैलरी: हाई कोर्ट 

कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के वेतन का भुगतान नियमित रूप से किया जाएगा, और यदि जरूरी हो, तो भी सैलरी में 20 प्रतिशत से अधिक कटौती नहीं होगी.

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aajtak.in

  • नई दिल्‍ली,
  • 06 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 1:44 PM IST
  • अभिभावक केवल ट्यूशन फीस का भुगतान करेंगे
  • अदालत ने यह भी कहा है कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 में स्‍कूल फीस में कोई वृद्धि नहीं होगी

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने अपने ताजा आदेश में कहा है कि स्कूल तब तक छात्रों से केवल शिक्षण शुल्क (ट्यूशन फीस) ही वसूल सकते हैं जब तक सरकार यह घोषणा नहीं कर देती कि कोरोना वायरस महामारी खत्म हो चुकी है. कोर्ट ने 5 नवंबर को अपनी टिप्पणी में यह भी कहा कि शैक्षणिक वर्ष 2020-21 के लिए फीस में वृद्धि नहीं की जाएगी. कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के वेतन का भुगतान नियमित रूप से किया जाएगा, और यदि जरूरी हो, तो भी सैलरी में 20 प्रतिशत से अधिक कटौती नहीं होगी.

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याचिकाकर्ताओं के वकील दिनेश उपाध्याय ने जनहित याचिका में आर्थिक परेशानी के मद्देनजर स्कूल फीस माफी की मांग की थी. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय यादव और न्यायमूर्ति आर के दुबे की खंडपीठ ने कहा कि हालांकि वर्तमान में स्कूल बंद हैं, फिर भी स्‍कूलों को फीस दी जानी चाहिए. चूंकि निजी मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान सरकार से धन प्राप्त नहीं करते हैं, इसलिए वे पूरी तरह से फीस पर निर्भर हैं.

अदालत के आदेश के अनुसार, छात्र/ अभिभावक केवल ट्यूशन फीस का भुगतान करेंगे जिसमें अन्य शुल्क जैसे पुस्तकालय शुल्क, प्रयोगशाला शुल्क, कंप्यूटर शुल्क शामिल नहीं होंगे. अदालत ने यह भी कहा है कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 में स्‍कूल फीस में कोई वृद्धि नहीं होगी. 

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