एग्जाम ही नहीं, बॉडी लैंग्वेज को लेकर भी परेशान हैं स्टूडेंट्स, NCERT के सर्वे में सामने आए ये आंकड़े

एनसीईआरटी ने 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 3.79 लाख स्कूली बच्चों के तनाव को लेकर सर्वे किया. इसमें पता चला है कि क्लास बढ़ने के साथ परीक्षा के अलावा बॉडी लैंग्वेज को लेकर भी दबाव में रहते हैं छात्र. आइए जानते हैं क्या कहती है पूरी रिपोर्ट...

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प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 6:40 PM IST

स्कूली छात्रों में पढ़ाई के दौरान परीक्षा और रिजल्ट चिंता का प्रमुख कारण हैं. 33 प्रतिशत से अधिक छात्र ज्यादातर समय साथी छात्रों के बेहतर प्रदर्शन की वजह से दबाव में रहते हैं. यह जानकारी राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण पर किए गए एक सर्वेक्षण में दी है. 

रिपोर्ट में बताया गया है कि कम से कम 73 प्रतिशत छात्र अपने स्कूली जीवन से संतुष्ट हैं. वहीं, 45 प्रतिशत से अधिक छात्र अपनी बॉडी लैंग्वेज को लेकर संतुष्ट नहीं हैं. एनसीईआरटी ने 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 3.79 लाख से अधिक छात्रों का सर्वे करने के बाद यह रिपोर्ट जारी की है. 

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एनसीईआरटी की मनोदर्पण सेल ने मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण से संबंधित पहलुओं पर स्कूली छात्रों की धारणाओं को समझने में मदद करने के लिए यह सर्वे किया था. इसके लिए जनवरी से मार्च 2022 के बीच मिडिल स्टेट (6-8) और सेकेंडरी स्टेज (9-12) के छात्र-छात्राओं की जानकारी एकत्र की. 

क्लास बढ़ने पर बढ़ने लगता है तनाव

छात्रों की पहचान उजागर नहीं हो, यह सुनिश्चित करने के लिए उनके नाम के कॉलम को वैकल्पिक रखा गया था. इससे छात्रों को जवाब देने में सुविधा हुई, उनकी गोपनीयता बनी रही और उन्होंने आजादी के साथ जवाब दिए. एनसीईआरटी ने कहा, "जैसे छात्र मिडिल से सेकेंडरी स्टेज में जाते हैं, उनमें व्यक्तिगत और स्कूली जीवन की संतुष्टि में गिरावट दिखती है.” 

मंगलवार को जारी सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है, “सेकेंडरी स्टेज में छात्रों के सामने पहचान बनाने की चुनौती का संकट, रिश्तों के प्रति संवेदनशीलता में वृद्धि, साथियों का दबाव, बोर्ड परीक्षाओं का डर, भविष्य में प्रवेश की अनिश्चितता का अनुभव, करियर की अनिश्चितता आदि देखी जाती हैं. 

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बदलाव के अनुसार खुद को ढालना भी चुनौती 

सर्वे में जवाब देने वाले 81 प्रतिशत छात्रों ने बताया कि अध्ययन, परीक्षा और परिणाम उनकी चिंता का मुख्य कारण थे. वहीं, 43 प्रतिशत छात्रों ने स्वीकार किया कि वे होने वाले बदलावों के साथ खुद को जल्दी से ढालने में सक्षम थे. मिडिल स्टेज के 46 प्रतिशत छात्रों ने कहा कि वे बदलावों को जल्दी स्वीकार कर लेते हैं, जबकि सेकेंडरी लेवल के 41 फीसदी छात्र ही इसके लिए तैयार थे.   

सर्वे के अनुसार, कुल 51 प्रतिशत छात्रों ने बताया कि उन्हें ऑनलाइन सीखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. वहीं, 28 प्रतिशत छात्रों ने कहा कि वे सवाल पूछने में हिचकते हैं. यह पाया गया कि "योग और ध्यान ने उनके सोचने के तरीके को बदलने का प्रयास किया. छात्रों द्वारा तनाव से निपटने के लिए अक्सर उपयोग की जाने वाली रणनीति के रूप में इसे रिपोर्ट किया गया था."

 

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