चुनाव जीतने के बाद पहली बार संसद पहुंचे 'सांसद', ये कैसे डिसाइड होगा कि कौन कहां बैठेगा?

Lok Sabha Session 2024: लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद आज सांसद पहली बार लोकसभा पहुंचे हैं, जहां वे सांसद पद की शपथ लेंगे.

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सदन में पार्टी के सदस्यों के आधार पर सींटों का बंटवारा होता है. सदन में पार्टी के सदस्यों के आधार पर सींटों का बंटवारा होता है.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 जून 2024,
  • अपडेटेड 1:03 PM IST

आज से 18वीं लोकसभा का पहला संसद सत्र शुरू हो गया है. लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद अब सांसद पहली बार लोकसभा पहुंचे हैं, जहां वे सांसद पद की शपथ ले रहे हैं, जिसके बाद सदन के आधिकारिक सदस्य हो जाएंगे. आपने देखा होगा कि जब भी संसद सत्र चलता है तो सांसद एक तय स्थान पर बैठे रहते हैं.तो क्या आप जानते हैं उनकी ये सीट कौन तय करता है और ये किस आधार पर तय की जाती है? या फिर सांसद अपने हिसाब से कोई भी सीट ले लेते हैं... 

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कौन कहां बैठता है?

आपको बता दें कि संसद में किसी भी सांसद के बैठने की सीट उसकी पार्टी की संख्या के आधार पर तय होती है. उसकी पार्टी के जितने ज्यादा सांसद होते हैं, उसके हिसाब से सांसदों को सीट दी जाती है. संसद में बैठने के लिए कई ब्लॉक्स होते हैं और पार्टी के सदस्यों की संख्या के आधार पर उनके ब्लॉक्स तय होते हैं. अगर किसी पार्टी के 5 से ज्यादा सांसद हैं तो उनके लिए अलग व्यवस्था होती है, जिन सासंदों के 5 से कम सांसद होते हैं, उनकी अलग व्यवस्था होती है. इसके बाद निर्दलीय सांसदों को जगह दी जाती है. 

बता दें कि सदन में सबसे पहला बंटवारा पक्ष और विपक्ष के आधार पर होता है. आगे के ब्लॉक्स में स्पीकर के दाएं हाथ की तरह सत्ता पक्ष बैठता है और बाएं हाथ की तरह विपक्ष की सीट होती है. इसके अलावा लेफ्ट साइड में एक सीट डेप्यूटी स्पीकर के लिए तय होती है और उसके पास विपक्ष के फ्लोर लीडर बैठते हैं. इसके बाद बाईं तरफ सांसदों की संख्या के आधार पर ब्लॉक्स डिवाइड किए जाते हैं. जैसे इस बार सबसे आगे दाईं तरफ बीजेपी और लेफ्ट साइट में कांग्रेस के सांसद बैठेंगे. 

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इसके बाद ऊपर के ब्लॉक्स में कम सांसद वाली पार्टियों को जगह मिलती है और इसमें फ्रंट रो के आधार पर सांसदों को सीट दी जाती है. जिस पक्ष के ज्यादा सांसद होते हैं, उन्हें उतनी ही फ्रंट रो मिलती है. इन ब्लॉक्स के आधार पर सांसदों की सीट तय की जाती है.  

कौन करता है डिसाइड?

ये सदन के स्पीकर की ओर से डिसाइड किया जाता है. डायरेक्शन 122(a) के तहत स्पीकर हर सांसद को सीट अलॉट करते हैं और उसके हिसाब से ही सांसद को सीट पर बैठना होता है. 

सीनियर सांसदों के लिए अलग है व्यवस्था

वहीं, कुछ सीनियर सांसदों की तबीयत को देखते हुए सीट व्यवस्था में बदलाव किया जाता है. जैसे जब मुलायम सिंह यादव सांसद थे तो उनकी पार्टी के कम सांसद थे. इस स्थिति में उन्हें पीछे की सीट दी जानी चाहिए थी, लेकिन उनकी तबीयत को देखते हुए उन्हें आगे की सीट दी गई थी. ऐसा ही एचडी देवेगौड़ा के साथ भी हुआ था. 

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