फॉर्म 17-C में ऐसा क्या लिखा होता है? जिसके आधार पर कहा जा रहा EVM से धांधली मुमकिन नहीं

दिल्ली विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है. 5 फरवरी को वोटिंग और 8 फरवरी को मतगणना होना तय हुआ है. ऐसे में चुनाव के दौरान धांधली न हो, इसको लेकर चुनाव आयोग की काफी तैयारी रहती है, कई सारी प्रक्रियाएं होती हैं. इन में से ही एक है फॉर्म 17C, जानते हैं ये होता क्या है?

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चुनाव में ईवीएम की पादर्शिता चुनाव में ईवीएम की पादर्शिता

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 4:34 PM IST

दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकतर चीफ इलेक्शन कमिश्नर राजीव कुमार ने  वोटिंग में धांधली और ईवीएम में गड़बड़ी को लेकर सारी प्रक्रियाओं के बारे में स्पष्ट और विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने कहा कि  कहा कि  चुनाव में कोई धांधली हो ही नहीं सकती है. वोटर लिस्ट बनने की प्रक्रिया से लेकर वोट डालने और काउंटिंग तक हर प्रक्रिया में सभी राजनीतिक पार्टी के प्रतिनिधि मौजूद होते हैं.

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इलेक्ट्रॉल रोल बनाने से लेकर वोटिंग और काउंटिंग के दिन भी अलग-अलग मौकों पर राजनीतिक पार्टियों के बूथ लेवल एजेंट, पोलिंग एजेंट और काउंटिंग एजेंट होते हैं. इनके सामने और इनकी सहमति से ईवीएम जांच से लेकर वोटिंग शुरू करवाने और खत्म करवाने तक की प्रक्रियाएं पूरी होती है. इसी तरह मतगणना की भी सारी प्रक्रियाएं राजनीतिक पार्टियों के काउंटिंग एजेंट के सामने उनकी सहमति और आपत्ति के बाद ही पूरी होती है. पूरी चुनाव की पारदर्शिता फॉर्म 17C पर निर्भर करती है. जानते हैं ये होता क्या है?

राजनीतिक पार्टियों के एजेंट के सामने संपन्न होती है हर एक चुनावी प्रक्रिया
वोटिंग के दिन हर बूथ पर हर पार्टी का एक पोलिंग एजेंट होता है. वोटिंग शुरू होने से पहले सभी पार्टियों के पोलिंग एजेंट के सामने मतदान अधिकारी और कर्मी ईवीएम खोलकर दिखाते हैं कि वे सही तरीके से काम कर रहे हैं. हर एक ईवीएम पर उस वक्त ही आपत्ति भी ली जाती है. इसके बाद वोटिंग शुरू होता है. 

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ईवीएम सील और चेक होते वक्त मौजूद होते हैं पार्टियों के एजेंट
इस प्रक्रिया से पहले वोटिंग से करीब 7-8 दिन पूर्व जब ईवीएम को सील करके स्ट्रांग रूम में रखा जाता है. उस वक्त भी राजनीतिक दल के प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं. स्ट्रांग रूम में ईवीएम सील करने के बाद उनका सीरियल नंबर सभी प्रतिनिधियों को दे दिया जाता है. फिर पोलिंग डे के दिन अलग-अलग बूथ पर पार्टियों को पोलिंग एजेंट के सामने ईवीएम का सील खोला जाता है और उसके सीरियल नंबर भी चेक कराकर डिटेल दिये जाते हैं. साथ ही सभी के सामने ये पुष्टि की जाती है कि कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हो रही है. इसलिए मॉक पोल भी पार्टियों के पोलिंग एजेंट के सामने करके दिखाई जाती है.

क्या होता है फॉर्म 17C
शाम को पोल खत्म होने के बाद किस ईवीएम में कितने वोट पड़े इसकी डिटेल्स एक फॉर्म में भरी जाती है. ये सारा सबकुछ बूथ पर मौजूद पार्टियों के पोलिंग एजेंट के सामने होता है. इसी फॉर्म को 17C कहा जाता है. इसमें बूथ में मौजूद ईवीएम की संख्या दर्ज कर उसमें पड़े वोट की संख्या दर्ज की जाती है. फिर ईवीएम को सील कर स्ट्रॉन्म रूम भेज दिया जाता है. चूंकि सुबह से शाम तक बूथ पर पार्टियों के पोलिंग एजेंट रहते हैं, इसलिए उनके पास भी ईवीएम के सारे डिटेल्स मौजूद होते हैं. इस तरह फॉर्म 17C में ईवीएम और उसमें डाले गए वोट के डिटेल्स  भरकर इसकी एक-एक कॉपी सभी पोलिंग एजेंट को दी जाती है.

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काउंटिंग के दिन काम आता है 17सी फॉर्म
काउंटिंग के दिन फिर से स्ट्रांग रूम में सील कर रखे गए ईवीएम का मिलान कर उन्हें पार्टियों के काउंटिंग एजेंट के सामने खोला जाता है और उन्हें मिले 17C फॉर्म से मिलाने को कहा जाता है. इस तरह पूरे चुनाव के दौरान कहीं से किसी तरह की धांधली का सवाल नहीं उठता है. क्योंकि सारी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से सभी पार्टियों के एजेंट के सामने पूरी की जाती है. अगर किसी ईवीएम में वोटों की संख्या में थोड़ा भी संदेह होता है तो उसे किसी भी पार्टी का कोई भी एजेंट फॉर्म 17सी से मिलान कर उसके सही या गलत आंकड़े की पुष्टि कर सकता है.

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