Exclusive: दिल्ली में ISI के इशारे पर घुसपैठ, दावत ए इस्लामी के जरिए PAK आतंकी ने बनाया नेटवर्क

आजतक की स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम ने एक सीक्रेट ऑपरेशन किया है- ऑपरेशन दावत-ए-इस्लामी. दावा है कि पाकिस्तान के इसी संगठन की आड़ लेकर ISI ने वर्षों तक एक बड़े आतंकी को भारत में शरण दिलाई.  एक आतंकवादी जो 17 साल तक भारत में घूमता रहा. उसने अपनी पहचान छिपाई, नाम बदला और देश में रहकर पाकिस्तान के इशारे पर बड़े आतंकी हमलों को अंजाम देने का काम किया.

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दिल्ली में ISI के इशारे पर घुसपैठ (सांकेतिक) दिल्ली में ISI के इशारे पर घुसपैठ (सांकेतिक)

अरविंद ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 04 अक्टूबर 2022,
  • अपडेटेड 11:42 AM IST

पाकिस्तानी संगठन दावत ए इस्लामी सिर्फ भारत में सक्रिय रूप से काम नहीं कर रहा है बल्कि इसके जरिए देश में ISI एक बड़ा आतंकी नेटवर्क भी खड़ा करने की तैयारी कर रहा है. इसको लेकर इनपुट तो पहले से मिलते आ रहे हैं, लेकिन अब आजतक की स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम ने एक सीक्रेट ऑपरेशन किया है- ऑपरेशन दावत-ए-इस्लामी. दावा है कि पाकिस्तान के इसी संगठन की आड़ लेकर ISI ने वर्षों तक एक बड़े आतंकी को भारत में शरण दिलाई.  एक आतंकवादी जो 17 साल तक भारत में घूमता रहा. उसने अपनी पहचान छिपाई, नाम बदला और देश में रहकर पाकिस्तान के इशारे पर बड़े आतंकी हमलों को अंजाम देने का काम किया.

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पहचान छिपाई, आतंकी नेटवर्क बढ़ाया

इस आतंकी का नाम मोहम्मद अशरफ है जिसने 17 साल पहले भारत में एंट्री ली थी. इसने अपना नाम बदल अली अहमद नूरी कर लिया था. पिछले साल 11 अक्टूबर को दिल्ली से इसे गिरफ्तार किया गया. नूरी के पास ही पूछताछ के बाद AK-47 समेत और दूसरे हथियार और हैंड ग्रेनेड मिले थे. आजतक के पास एक्सक्लूजिव जानकारी है कि गिरफ्तार अशरफ नूरी भारत में 2004 से रह रहा था. दावा तो ये भी है कि कई हमलों में इसका हाथ हो सकता है. 

सत्रह साल तक ये आतंकवादी भारत में पाकिस्तानी संगठन दावत-ए-इस्लामी की आड़ लेकर बचता रहा. पूछताछ के दौरान इस आतंकी ने अपने बयान में बताया था कि ISI के नासिर के कहने पर ये दावत-ए-इस्लामी से जुड़ गया था. जिसमें दावत-ए-इस्लामी की तरफ से इसे हर महीने एक सैलरी भी दी जाती थी. दावा है कि दावत-ए-इस्लामी की आड़ में ही अशरफ भारत में अपना टेरर नेटवर्क बढ़ाता रहा. यानी दावत-ए-इस्लामी भले धर्म के नाम पर चलने वाला एक संगठन हो, लेकिन ISI इसकी आड़ में भारत में आतंकियों को पे रोल पर रखने का भी काम करता है. जैसा दावा है कि गिरफ्तार अशरफ 15 से 18 हजार रुपए भारत में दावत-ए-इस्लामी की तरफ से पाता रहा. और दस साल तक एक आतंकी दावत-ए-इस्लामी की आड़ मे शरण लिया रहा.

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(गिरफ्तार हुआ आतंकी मोहम्मद अशरफ)

अब सवाल ये उठता है कि भारत में पाकिस्तानी संगठन दावत-ए-इस्लामी में कैसे एक आतंकी 10 साल तक काम करता रहा ? क्यों किसी और को नहीं पता चला ? इस सवाल का जवाब दावत-ए-इस्लामी के एक मौलाना ने आजतक को बता दिया है. ये वहीं मौलाना है जिससे जांच एजेंसी भी सवाल-जवाब कर चुकी है. एक नजर उस मौलाना के साथ हुई बातचीत पर डालते हैं-

रिपोर्टर- ये जो मोहम्मद अशरफ अली था ये पाकिस्तानी है ये आपको कब पता चला

मौलाना- इसको अली के नाम से जानते थे इसको, इंडियन डॉक्यूमेंट थे इसके उसी के बिनाह पर इसको अली के नाम से जानते थे , जब न्यूज आई तो ऐसा ऐसा इसका मामला है

रिपोर्टर- अच्छा तब तक आप लोगों को मालूम नहीं था की ये पाकिस्तानी है

मौलाना- नहीं,  स्टेटमेंट था मेरा वो तो दिल्ली पुलिस के पास भी है, सारी चीजें हैं, लेकिन इस टाइप का उग्रवादी है, आतंकवादी है ये तब पता चला जब न्यूज छपी थी.

रिपोर्टर- ये आप से मिला कैसे

मौलाना- दावते इस्लामी से अटैच्ड था ये भी (पाकिस्तानी)) मैं भी दावते इस्लामी से जुड़ा हुआ था, तो दावते इस्लामी के प्रोग्राम में दिल्ली में इस से मुलाकात हुई थी मेरी

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रिपोर्टर- तो उसके बाद और भी जैसे दावते इस्लामी का जियारत होता रहता था तो उसमें भी मुलाकात करता रहता था क्या?

मौलाना- हां हां, दावते इस्लामी में आना जाना रहता था इसका और 2015 से 2018 के बीच में कई बार मुलाकात हुई थी इससे

अब आजतक की ये रिपोर्ट बताने के लिए काफी है कि पाकिस्तान दावत ए इस्लामी के जरिए भारत में अपने आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने का काम कर रहा है. पहचान छिपाकर कई सालों तक ना सिर्फ देश में शरण ली जा रही है, बल्कि नए स्लीपर सेल भी तैयार किए जा रहे हैं. 

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