आयकर अधिकारी बन 6 साल तक लूटते रहे साइबर ठग, 70 साल की महिला ने गंवाए 1.15 करोड़

मुंबई की एक 70 वर्षीय विधवा महिला के साथ करीब 1.15 करोड़ रुपए की साइबर ठगी की सनसनीखेज घटना सामने आई है. इस मामले में सबसे बड़ी बात ये कि ठग बुजुर्ग महिला को लगातार छह साल तक ठगते रहे, लेकिन उनको भनक तक नहीं लगी.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

aajtak.in

  • मुंबई,
  • 02 जुलाई 2025,
  • अपडेटेड 6:00 PM IST

मुंबई की एक 70 वर्षीय विधवा महिला के साथ करीब 1.15 करोड़ रुपए की साइबर ठगी की सनसनीखेज घटना सामने आई है. इस मामले में सबसे बड़ी बात ये कि ठग बुजुर्ग महिला को लगातार छह साल तक ठगते रहे, लेकिन उनको भनक तक नहीं लगी. पिछले साल जब पीड़िता ने अपने परिजनों को इसके बारे में बताया, तब जाकर खुलासा हुआ. पीड़ित महिला ने साइबर सेल में केस दर्ज कराया है.

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जानकारी के मुताबिक, मुंबई के वर्ली इलाके में रहने वाली बुजुर्ग महिला को सबसे पहले साल 2019 में कॉल आई. महिला कॉलर ने खुद को इनकम टैक्स विभाग का अधिकारी बताया. उसने कहा कि बुजुर्ग महिला के मृतक पति के नाम पर सरकार के पास रिफंड की राशि पड़ी है. इसे वापस पाने के लिए टैक्स और जुर्माना चुकाना होगा. कॉलर ने इस तरह से अपनी बात रखी कि बुजुर्ग झांसे में आ गई.

दादर थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार आरोपी महिला की कॉल लगातार आने लगी. पीड़िता से समय-समय पर अलग-अलग कारणों से भुगतान करने के लिए कहा गया. इसमें कभी टैक्स पेंडिंग बताया गया, कभी पेनल्टी, कभी फॉर्म फीस, तो कभी वेरिफिकेशन चार्ज के नाम पर पैसे ऐंठे गए. इस तरह छह साल में करीब 50 बार पैसे मांगे, जिसमें 1.15 करोड़ रुपए आरोपियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कराए गए.

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इसके साथ ही पीड़ित महिला को लगातार भरोसा दिलाया जाता रहा कि अगली प्रक्रिया पूरी होते ही पूरा पैसा ट्रांसफर कर दिया जाएगा. इधर, परेशान होकर पीड़िता ने अपने एक परिजन से इस रिफंड प्रक्रिया का जिक्र किया. तब जाकर उनको शक हुआ. उन्होंने तुरंत जांच कराई और पाया कि यह पूरा मामला साइबर ठगी का है. इसके बाद बुजुर्ग महिला ने सोमवार को दादर थाने के साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई.

पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की तलाश के लिए तकनीकी टीम को लगा दिया गया है. कॉल डिटेल्स, ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और बैंक खातों की जांच की जा रही है. इस केस की सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि ठगी का खेल पूरे छह साल तक धीरे-धीरे चलता रहा.

ये केस हर किसी के लिए चेतावनी है, जो बिना पुष्टि के कॉल्स और ईमेल्स पर भरोसा कर लेते हैं. खासतौर से बुजुर्गों को निशाना बनाना अब साइबर अपराधियों की नई रणनीति बन चुकी है. पुलिस बार-बार अपील कर रही है कि किसी भी अनजान कॉल पर वित्तीय जानकारी साझा न करें. कोई भी सरकारी अधिकारी बैंक डिटेल या पेमेंट के लिए फोन नहीं करता. ऐसी कॉल्स आते ही सतर्क हो जाना चाहिए.

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