मध्य प्रदेश की रीवा पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है. पिछले दिनों नेशनल हाईवे पर टाइम बम लागकर उड़ाने की धमकी देकर दहशत फैलाने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने बताया कि एक मैकेनिकल इंजीनियर की नौकरी चली गई थी जिसके बाद उसने इस तरह दहशत फैलाने का काम शुरू किया. वो पिछले 6 साल से ट्रेन और हाईवे तक में 13 बार डमी बम लगाकर दहशत फैला चुका है. पूछताछ में इसने बताया कि उसका मकसद अपना प्रभाव बनाना था.
रीवा जिले में कुछ दिनों पहले नेशनल हाईवे में डमी बम रखकर दहशत फैलाई जा रही थी. पुलिस हाईवे और टोल प्लाजा में लगे सीसीटीवी कैमरों के आधार पर आरोपी की पहचान की. पुलिस ने जाल बिछाया और आरोपियों को एमपी-यूपी की सीमा से लगे इलाके से गिरफ्तार कर लिया. पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है. पुलिस डमी बम के साथ मिली चिट्ठियों की हैंडराइटिंग का मिलान भी कर रही है.
मैकेनिकल इंजीनियर है प्रमुख आरोपी
इस मामले पर एसपी नवनीत भसीन ने बताया कि गिरोह का प्रमुख आरोपी यूपी के प्रयागराज का रहने वाला मैकेनिकल इंजीनियर है. जो प्राइवेट जॉब करता था. लेकिन 2015 में उसकी नौकरी छूट गई क्योंकि उसे मिर्गी के दौरे आते थे. इसके अलावा दूसरा आरोपी मेरठ का रहने वाला है जो एलएलबी कर चुका है. तीसरा आरोपी भी मेरठ का ही रहने वाला है.
एसपी के मुताबिक शुरुआती पूछताछ में उन्होंने बताया है कि यह लोग भ्रष्टाचार और समाज में फैली गंदगी के बारे में अपनी बात को सामने रखना चाहते थे और इनका मानना था कि ऐसा करने से इनकी बात को ज्यादा जोर मिलेगा. आरोपियों के कब्जे से डमी बम बनाने की सामग्री भी बरामद हुई है. इनके कब्जे से इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, मदर बोर्ड, पेंट, टेप, एल्युमीनियम तार, इलेक्ट्रानिक घड़ी मिली है.
अबतक लगा चुके हैं 13 डमी बम
आरोपियों ने महानगरी एक्सप्रेस ट्रेन सहित अलग-अलग 13 स्थानों पर डमी बम रखे थे. आरोपियों ने पहली बार 28 जनवरी 2016 में 11094 महानगरी एक्सप्रेस (मानिकपुर में), 04 फरवरी 2016 में मेजा यूपी, 13 मार्च 2016 मेजा यूपी, मार्च 2017 में संगम एक्सप्रेस ट्रेन (हापुड़ के पास मेरठ) 08 जनवरी 2022 नैनी प्रयागराज, 13 जनवरी 22 सिरसा मेजा, 16 जनवरी मेजा ओवर ब्रिज, 21 जनवरी सोहागी, 26 जनवरी गंगेव, 26 जनवरी मनगवां, 29 जनवरी मऊगंज और 02 फरवरी मेजा यूपी में डमी बम रख कर दहशत फैला चुके है. पुलिस ने इन पर 10 हजार का इनाम घोषित कर रखा था.
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विजय कुमार विश्वकर्मा