Singapore Airlines Flight SQ321 Turbulence Terror: आपने हवाई जहाज़ के टर्बुलेंस में फंसने के बारे में तो सुना होगा. लेकिन अगर कोई फ्लाइट टर्बुलेंस में फंस कर महज़ 5 मिनट में 6 हज़ार फीट नीचे गिर जाए, तो उसकी हालत कैसी होगी? तो आज बात एक ऐसी फ्लाइट की, जिसके मुसाफिरों की आंखों के सामने चंद मिनटों में मौत नाच गई.
टर्बुलेंस ऐसा था कि लोग फ्लाईट के अंदर गोते खाने लगे, छतों और दीवारों से टकराने लगे. लगा कि प्लेन कभी भी क्रैश हो जाएगा. 200 से ज्यादा मुसाफिरों वाली ये फ्लाइट आखिरकार लैंड तो हो गई, मगर इसका हर मुसाफिर मौत से मिल कर लौट चुका था.
हीथ्रो एयरपोर्ट, लंदन - सोमवार 20 मई, रात 10.17 बजे
लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट से सिंगापुर एयरलाइनंस की एक फ्लाइट 'एसक्यू 321' 211 पैसेंजर्स और 18 क्रू मेंबर्स को लेकर सिंगापुर के लिए उड़ान भरती है. सफ़र शुरू होता है और तकरीबन 11 घंटे तक तमाम मुसाफिर इस आलीशान फ्लाइट का मज़ा लेते हुए अपनी मंज़िल की ओर बढ़ रहे होते हैं. शाम का वक्त है और हवाई जहाज के परिचारक यानी एयरहोस्टेस लोगों को नाश्ता परोस रहे हैं. फ्लाइट इस वक्त म्यांमार के आसमान में है. लेकिन तभी फ्लाइट के कैप्टन अचानक अपने पैसेंजर्स को एक संभावित टर्बुलेंस के बारे में बताते हुए उन्हें अपनी-अपनी जगह पर शांति से बैठ जाने और सीट बेल्ट लगा लेने की सलाह देते हैं. एनाउंसमेंट सुन कर मुसाफिरों की मदद करने के बाद क्रू मेंबर्स भी फौरन अपनी-अपनी जगह पर लौट जाते हैं.
हवा में लहराने लगा विमान
लेकिन अभी बमुश्किल 10 सेकंड का वक्त गुजरता है कि हवाई जहाज़ बीच आसमान में बुरी तरह लहराने लगता है. गड़गड़ाती हुई फ्लाइट कभी दांये तो कभी बांये बुरी तरह से झुकने लगती है. ऐसा लगता है मानों विमान पर कैप्टन का कंट्रोल खोता जा रहा है. लेकिन ये तो इस फ्लाइट में सफर कर रहे मुसाफिरों के मुसीबत की बस शुरुआत भर है. अगले चंद मिनटों में कुछ ऐसा होता है, जो हर किसी के तमाम बुरे ख्वाबों से भी परे है. अचानक से हवाई जहाज तेज़ी से नीचे गिरने लगता है.
कांप उठी यात्रियों की रूह
जी हां, नीचे गिरने लगता है और ये सब इतने भयानक ढंग से होता है कि सही तरीके से सीट बेल्ट बांधे बगैर अपनी-अपनी जगह पर बैठे मुसाफिर फ्लाइट के अंदर ही हवा में कलाबाजी खाने लगते हैं. लोगों के सिर फ्लाइट की छत से जा टकराते हैं. ऑक्सीजन मास्क खुल कर नीचे लटकने लगते हैं. फूड और ब्रेकफॉस्ट की ट्रॉली बेकाबू होकर बीच कॉरिडोर में रेस लगाने लगती है. कोई फ्लाइट की अंदरुनी दीवार से जा भिड़ता है, तो कोई सीट के हैंडल से टकराता है. हालत ये होती है कि टर्बुलेंस के झटकों से इस फ्लाइट में सवार तकरीबन हर किसी को कुछ ना कुछ नुकसान जरूर होता है. चंद मिनटों का ये वक़्त हर मुसाफिरों को कभी ना ख़त्म होने वाला समय लगता है. समझिए रूह कांप उठती है.
क्रैश होने वाली थी फ्लाइट
फ्लाइट जिस तेजी से नीचे गिरती उससे क्या क्रू मेंबर्स क्या मुसाफिर और क्या पायलट्स एक पल के लिए हर किसी को लगता है कि यही उनकी जिंदगी का आखिरी पल है, क्योंकि एयर टर्बुलेंस में फंस कर ये फ्लाइट अब बस क्रैश होने ही वाली है. और अगर ऐसा होता है तो किसी के भी बचने की उम्मीद नहीं है. पूरे फ्लाइट में चीख-पुकार, दुआएं-प्रार्थनाएं, रोना-पिटना, अफ़सोस-पश्चताप सब कुछ एक साथ चल रहा होता है. कई मुसाफिर तो ऐसे होते हैं जो मन ही मन हार मान चुके होते हैं और अपने आखिरी अंजाम का इंतजार करने लगते हैं.
6 हज़ार फीट नीचे आया विमान
क्या आप यकीन करेंगे कि इस तरह ये फ्लाइट महज़ पांच मिनट से भी कम समय में 6 हज़ार फीट नीचे आ जाती है. या यूं कहें कि नीचे गिर जाती है. जब ये फ्लाइट टर्बुलेंस में फंसती है, तब वो 37 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रही होती है, लेकिन महज पांच मिनटों में फ्लाइट 31 हज़ार फीट की ऊंचाई पर पहुंच जाती है. और ये एक भयानक तजुर्बा है. पूरे होशो हवास में जीते जी नियर डेथ एक्सपीरिएंस क्या होता है, ये इस फ्लाइट के मुसाफिर महज चंद मिनटों में महसूस कर लेते हैं.
बैंकॉक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला
लेकिन इसे कुदरत का करिश्मा कहिए, पायलट की समझदारी या फिर कुछ और धीरे-धीरे ही सही फ्लाइट इस भयानक टर्बुलेंस यानी हवा के झटकों से उबर कर सामान्य मौसम वाले एरिया में पहुंचने में कामयाब हो जाती है. और फ्लाइट में सवार मुसाफिरों से लेकर क्रू मेंबर्स तक राहत की सांस लेने लगते हैं. इसी के साथ फ्लाइट के कैप्टन अब लोगों को ढांढस बताते हुए ये ऐलान करते हैं कि अब उनकी फ्लाइट सिंगापुर के झांगी एयरपोर्ट की जगह थाईलैंड में बैंकॉक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करने वाली है. मुसाफिरों को कैप्टन के इस फैसले की वजह समझते हुए देर नहीं लगती, क्योंकि वो जानते हैं कि इस झटके से जहां कई मुसाफिरों को गंभीर चोटें आई हैं वहीं कई की तबीयत बिगड़ चुकी है. फ्लाइट को गहरा नुकसान पहुंचा है और ऐसे जर्जर फ्लाइट के साथ आगे उड़ान भरना खतरनाक हो सकता है.
एयरपोर्ट पर तैयारी
अब तक एटीसी यानी एयर ट्रैफिक कंट्रोल की मदद से बैंकॉक में इमरजेंसी लैंडिंग करने जा रहे इस फ्लाइट के बारे में एयरपोर्ट पर मौजूद ग्राउंड स्टाफ को इस फ्लाइट के साथ हुए हादसे की खबर मिल चुकी होती है. आनन-फानन में बैंकॉक एयरपोर्ट पर टेंपररी डिस्पेंसरी बना दी जाती है. घायल और बीमार मुसाफिर को अटेंड करने के लिए व्हील चेयर से लेकर स्ट्रेचर तक का इंतजाम कर लिया जाता है. और मेडिकल साजो सामान के साथ डॉक्टर्स और पैरामेडिक्स की टीम नीचे तैनात हो जाती है.
विमान लैंड करते ही यात्रियों ने ली राहत की सांस
उधर, कैप्टन में बेशक फ्लाइट के टर्बुलेंस से बाहर आ जाने का ऐलान कर दिया हो, अंदर मुसाफिरों की धड़कनें अब भी बढ़ी हुई हैं और वो हर हाल में जल्द से जल्द नीचे ज़मीन पर उतरना और खुद को सुरक्षित महसूस करना चाहते हैं. फिर चंद मिनटों की और उड़ान के बाद आखिरकार फ्लाइट एयरपोर्ट पर टच-डाउन करने में कामयाब हो जाती है और इसी के साथ फ्लाइट में सवार सभी के सभी लोग ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करने लगते हैं.
एक ब्रिटिश यात्री की मौत, 23 घायल
लेकिन दर्द और तकलीफ की कई कहानियां अभी भी बाकी हैं. जल्द ही ये साफ होता है कि इस फ्लाइट में अपनी पत्नी के साथ सफर कर रहे 73 साल के ब्रिटिश नागरिक ज्योफ़ किचन अब इस दुनिया में नहीं हैं, क्योंकि एयर टर्बुलेंस से पैदा हुए मौत के ख़ौफ से उन्हें हवा में ही हार्ट अटैक आ गया था और ये हार्ट अटैक उनके लिए जानलेवा साबित हुआ. इसके बाद तकरीबन 23 ऐसे मुसाफिरों की पहचान की जाती है, जो इस टर्बुलेंस में जख्मी होते हैं और इनमें भी 7 तो ऐसे हैं, जिन्हें सिर और शरीर के दूसरे हिस्सों में घातक चोटें आई हैं. यानी वो बुरी तरह से ज़ख्मी हैं.
मौत को छू कर वापस पर लौटी फ्लाइट
फ्लाइट की लैंडिंग के बाद जब रेस्क्यू स्टाफ पहली बार फ्लाइट के अंदर पहुंचते हैं और फ्लाइट की तस्वीरें मुसाफिरों के मोबाइल फोन में रिकॉर्डेड वीडियो की सूरत में जब बाहर आती हैं, तो उन्हें देख कर लोग चौंक जाते हैं. फ्लाइट का पूरा का पूरा केबिन बुरी तरह से टूट-फूटा नजर आता है. पूरे फ्लाइट में मलबे, मुसाफिरों के सामान और खून के छींटे नजर आते हैं. लेकिन गनीमत ये रहती है कि मौत को छू कर ही सही फ्लाइट धरती पर वापस आ चुकी है. और अगर एक ब्रिटिश नागरिक को छोड़ दिया जाए, तो सभी के सभी की जिंदगी भी बच जाती है. हां, इतना ज़रूर है कि ये फ्लाइट ऐसी है, जिसे इसमें सवार सभी के सभी मुसाफिर ताउम्र नहीं भूला सकेंगे, बल्कि इनमें से कई तो शायद ऐसे भी हों, जो अपने आने वाली जिंदगी में कभी उड़ान ही ना भरना चाहें.
सुप्रतिम बनर्जी