राजस्थान: पुष्कर से सैलानी- श्रद्धालु नदारद, सरकार से उम्मीद में लोग

लॉकडाउन के कारण पुष्कर के घाट सुनसान पड़ गए हैं. घाटों पर पर कुछ इक्का-दुक्का पुजारियों और लोगों के अलावा कोई नहीं है. बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालु कोरोना वायरस और लॉकडाउन की वजह से यहां नहीं आ रहे हैं.

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पुष्कर के घाट (Photo- Aajtak) पुष्कर के घाट (Photo- Aajtak)

देव अंकुर

  • पुष्कर,
  • 11 मई 2020,
  • अपडेटेड 4:02 PM IST

  • प्रतिदिन सुबह-शाम अब भी होती है आरती
  • पुजारी मास्क पहनकर करते हैं पूजा अर्चना

कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते आज राजस्थान में पुष्कर के घाट सूने पड़े हैं और भगवान ब्रह्मा के मंदिर में जहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते थे, वहां से लोग गायब हैं. आजतक जब पुष्कर के सूने पड़े घाटों पर पहुंचा तो देखा कि यहां पर कुछ इक्का-दुक्का पुजारियों और लोगों के अलावा कोई नहीं था. बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालु कोरोना वायरस और लॉकडाउन की वजह से यहां नहीं आ रहे हैं.

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प्रतिवर्ष पुष्कर में साल के इस समय लाखों की संख्या में देसी और विदेशी सैलानी और श्रद्धालु देखे जा सकते थे, पर अब साफ तौर पर कोरोना वायरस का इतना प्रकोप है कि पुष्कर नगरी में यह श्रद्धालु और सैलानी आने से डर रहे हैं.

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हालांकि, अब भी यहां के घाटों पर प्रतिदिन सुबह और शाम भगवान की आरती होती है. ब्रह्म सावित्री घाट, गऊ घाट पुष्कर के उन 52 घाटों में शामिल है, जहां प्रतिदिन पुजारी आरती तो करते हैं पर श्रद्धालु नदारद हैं. जो पुजारी आरती करते हैं, वे मास्क पहनते हैं ताकि स्वयं का कोरोना वायरस से बचाव कर सकें.

अर्थव्यवस्था चौपट

तीर्थ पुरोहित मधुसूदन पराशर ने आजतक से कहा, यहां पर कई प्रकार की पूजा अर्चना के लिए, अस्थि विसर्जन के लिए, पितृदोष संबंधित और अन्य पूजाओं के लिए लोग दूर-दूर से आया करते थे, पर अब कोरोना वायरस के प्रकोप और लॉकडाउन के चलते यहां की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है. किसी प्रकार से लोग संचित किए हुए साधनों से अपना काम चला रहे थे पर अब यह मुश्किल है.

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हमने जब पुष्कर के कुछ स्थानीय लोगों से बात की तो जाना कि किस प्रकार से कोरोना वायरस की वजह से ना केवल पुष्कर की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है, बल्कि यहां की रौनक भी चली गई है. पुष्कर के घाटों पर प्रतिदिन 5000 से 7000 श्रद्धालु, भक्तगण और सैलानी आया करते थे. पर अब कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते यह लोग यहां से गायब हैं.

सरकार दे मदद

सामाजिक कार्यकर्ता अरुण पराशर ने कहा, 'पुष्कर की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है. सरकार को चाहिए कि हमारी मदद के लिए आगे आए.' पुष्कर हालांकि राजस्थान के कम प्रभावित इलाकों में आता है जहां पर कोरोना वायरस के अब तक केवल एक मामला सामने आया है, लेकिन देशव्यापी लॉकडाउन के चलते यहां की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है.

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अरुण पराशर ने कहा, यहां पर जितने होटल हैं, वे सैलानियों के भरोसे थे पर अब कोरोना वायरस के प्रकोप की वजह से यहां पर सैलानियों ने आना बंद कर दिया है और लॉकडाउन की वजह से तमाम सड़कें और पुष्कर में आने-जाने के रास्ते बंद हैं जिसकी वजह से यहां की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित है. हम चाहते हैं कि सरकार हमारी मदद करें.

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पानी पहले से अधिक स्वच्छ

हालांकि, आजतक ने यह पाया कि लॉकडाउन के दौरान पुष्कर सरोवर का पानी पहले से काफी अधिक स्वच्छ और साफ हो गया है. इसका एक बड़ा कारण यह बताया जाता है कि इसमें अस्थि विसर्जन के अलावा फूल माला, गेहूं आदि पूजा अर्चना में लाए जाने वाली सामग्री का विसर्जन पिछले करीब 40 दिनों से बंद है, जिसकी वजह से यहां का पानी काफी स्वच्छ हो गया है.

सुनसान घाट

तीर्थ पुरोहित मधुसूदन पराशर का कहना है, 'सरोवर का पानी पहले से काफी साफ है, क्योंकि अस्थि विसर्जन और पूजा सामग्री का विसर्जन कुछ समय से बंद है.' आजतक ने पुष्कर के घाटों पर एक विदेशी सैलानी को देखा तो उनसे बात की. इजराइल से आई इस सैलानी का कहना था कि वह यहां पर आ तो गई थी पर लॉकडाउन की वजह से यहां से जा नहीं पा रही हैं.

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इजराइल से आई सैलानी एलाद डेन ने कहा, लॉकडाउन के चलते पुष्कर पूरी तरह से बदल चुका है. यह जगह अब शांत है, यहां पर शांति है. पहली जैसी चहल-पहल, भीड़ नहीं है. यहां से जाने के बाद मैं सबसे पहले हिमाचल जाना चाहूंगी.

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लॉकडाउन खत्म होने के बाद पुष्कर की अर्थव्यवस्था संभलने में काफी समय लग सकता है और यहां के लोग चाहते हैं कि सरकार उनकी मदद करे, ताकि पुष्कर नगरी एक बार फिर से अपने पैरों पर खड़ी हो पाए.

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