पंजाब के अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के पद्मश्री रागी ज्ञानी निर्मल सिंह के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद हो गया. स्थानीय प्रशासन ज्ञानी निर्मल सिंह के शव को पहले अमृतसर के दो श्मशान घाट पर लेकर गए. जहां पर श्मशान घाट की कमेटियों और स्थानीय लोगों ने श्मशान घाट के गेट पर ताला लगा दिया और कहा कि वो कोरोना वायरस से मारे गए किसी भी व्यक्ति का अंतिम संस्कार अपने श्मशान घाट पर नहीं होने देंगे, ऐसा करने पर संक्रमण का खतरा फैल सकता है.
स्थानीय प्रशासन ने लोगों को काफी देर समझाया लेकिन इसके बावजूद जब लोग नहीं माने तो अमृतसर के वेरका गांव में ज्ञानी निर्मल सिंह के शव को लेकर जाया गया. वहां पर भी श्मशान घाट की कमेटी और कुछ स्थानीय लोगों ने अंतिम संस्कार करने की परमिशन नहीं दी. इसके बाद गांव की पंचायत ने पंचायती जमीन स्थानीय प्रशासन को दी और वहां पर ज्ञानी निर्मल सिंह के शव का अंतिम संस्कार किया जा सका.
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हालांकि, इस दौरान गांव के कई लोगों ने अपनी पर्सनल जमीन भी अंतिम संस्कार के लिए देने का प्रस्ताव प्रशासन को दिया था. अमृतसर के वेरका गांव के स्थानीय काउंसलर हरपाल वेरका जो कांग्रेस पार्टी से संबंध रखते हैं, ने कहा कि स्थानीय लोगों को आशंका है कि अगर कोरोना वायरस से मारे गए किसी शख्स का अंतिम संस्कार यहां किया जाता है, तो आसपास में जो रिहायशी इलाका है, वहां पर इसका प्रभाव पड़ सकता है और वायरस के फैलने की आशंका हो सकती है. इसी वजह से स्थानीय लोग नहीं चाहते कि यहां पर उनका अंतिम संस्कार किया जाए और वो यही बात प्रशासन को बतौर स्थानीय काउंसलर होने की वजह से बता रहे हैं.
अकाली दल के प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने स्वर्ण मंदिर के पूर्व रागी और पद्मश्री ज्ञानी निर्मल सिंह के शव का अंतिम संस्कार करने के लिए श्मशान घाट की कमेटियों और लोगों द्वारा विरोध करने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. चीमा ने कहा कि ज्ञानी निर्मल सिंह ने सिख पंथ की काफी सेवा की है और इंसानियत के लिए काफी काम किया है, लेकिन जिस तरह से कोरोना वायरस से उनकी मौत होने को लेकर श्मशान घाट की कमेटियों ने उनके शव का अंतिम संस्कार करने से मना किया है ये बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है.
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उन्होंने कहा, लोगों को सोचना चाहिए कि उनकी इंसानियत आखिरकार कहां चली गई है. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि इससे पहले पंजाब के लुधियाना और फिरोजपुर में भी इसी तरह से कोरोना वायरस की वजह से जान गंवा चुके लोगों के शव का अंतिम संस्कार श्मशान घाट में करने का विरोध किया गया था और ये मानवता के लिए ठीक नहीं है.
'श्मशान घाट में जगह ना देना दुर्भाग्यपूर्ण'
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह लोंगोवाल ने भी सिख कौम के इतने बड़े नाम और पद्मश्री अवार्डी निर्मल सिंह की मृत्यु पर उनके अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाटों की कमेटियों और स्थानीय लोगों के विरोध पर कड़ा ऐतराज जताया. उन्होंने कहा, ज्ञानी निर्मल सिंह ने हमेशा ही मानवता के लिए काम किया और सिख कौम की काफी सेवा की है. ऐसे में उनके अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट में जगह ना देना इंसानियत के लिए बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है.
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लोंगोवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के स्थानीय काउंसलर के विरोध की वजह से अमृतसर के वेरका गांव में भी निर्मल सिंह का अंतिम संस्कार नहीं करने दिया जा रहा था. लोंगोवाल ने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अपने गुरुद्वारे की जमीन पर ज्ञानी निर्मल सिंह का अंतिम संस्कार भी करवाएगी और उनकी याद में एक मेमोरियल भी बनाया जाएगा.
सतेंदर चौहान