KGMU के डॉक्टर का दावा, कोरोना वायरस बना रहा ब्लड क्लॉटिंग, जिससे हो रही मौतें

कोरोना वायरस, फेफड़ों की नसों में ब्लड का थक्का बना रहा है. ब्लड क्लॉटिंग के कारण ऑक्सीजन के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं. इस वजह से कोरोना से जूझ रहे मरीजों की अचानक मौत हो जा रही है.

डॉ. वेद प्रकाश का दावा, ब्लड क्लॉटिंग से कोरोना मरीजों की होती है मौत
सत्यम मिश्रा
  • लखनऊ,
  • 14 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 9:03 AM IST

  • फेफड़ों की नसों में बन रहा ब्लड का थक्का
  • क्लॉटिंग के कारण ऑक्सीजन के रास्ते बंद

कोविड-19 थिंकटैंक के सदस्य और केजीएमयू के पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश का कहना है कि कोरोना वायरस, फेफड़ों की नसों में ब्लड का थक्का बना रहा है. इसलिए एकाएक लोगों की मौत हो जा रही है. उन्होंने बताया कि ब्लड क्लॉटिंग के कारण ऑक्सीजन के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं. इस वजह से कोरोना से जूझ रहे मरीजों की अचानक मौत हो जा रही है. कोरोना वायरस में अन्य बीमारियों की अपेक्षा ज्यादा क्लॉटिंग हो रही है, इसी वजह से मरीजों की सडन डेथ हो जा रही है.

डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि कोविड-19 पॉजिटिव केस में ज्यादा क्लॉटिंग क्यों हो रही है, इस पर अभी रिसर्च चल रहा है. पूरे विश्व भर में क्लॉटिंग के बहुत सारे मामले दर्ज किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि कोविड-19 पॉजिटिव केस में क्लॉटिंग है या नहीं, यह जांचने के लिए हम डी डायमर का टेस्ट कराते हैं. अगर डी डायमर का लेवल बढ़ा हुआ है तो हमलोग ट्रीटमेंट का प्रोटोकॉल फॉलो करते हैं और मरीजों को थक्के कम करने के लिए यानी कि खून पतला करने वाली दवा देते हैं.

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उन्होंने कहा, ऐसा इसलिए करते हैं ताकि जमा हुए थक्के को कम किया जा सके और मरीज को बचाया जा सके. एक्स-रे और सीटी स्कैन के जरिए भी क्रूड एनालिसिस करके अंदाजा लगाया जा सकता है की क्लॉटिंग है या नहीं. इसके अलावा पल्मोनरी हाइपरटेंशन और राइट फेलियर से भी इसका पता चल सकता है. लेकिन इसकी वास्तविक पड़ताल होती है ऑटोप्सी से. ऑटोप्सी के जरिए मृत शरीर से ऑर्गेंस निकाल कर उनकी जांच की जाती है और पता किया जाता है कि मौत का कारण क्लॉटिंग है या कुछ और?

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