सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने मुंबई स्थित फ़ार्मास्युटिकल कंपनी ग्लेनमार्क को कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा को लेकर गलत दावा करने और उसके मूल्य के संबंध में नोटिस जारी किया है. ये दवा है फ़ेविपिरविर, फ़ैबिफ्लू.
सीडीएससीओ ने कारण बताओ नोटिस में कहा है कि एक संसद सदस्य ने शिकायत की है कि फैबिफ्लू के साथ इलाज का कुल खर्च करीब 12,500 रुपये आएगा. ग्लेनमार्क का यह खर्च देश के गरीबों, निम्म मध्यम वर्ग और मध्यम वर्ग के दायरे से बाहर होगा.
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ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के तहत काम करने वाला सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का एक नियामक प्राधिकरण है. जो भारतीय फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा उपकरण आदि पर निगरानी रखता है.
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बहरहाल, नोटिस में कहा गया है, 'ग्लेनमार्क ने दावा किया है कि यह दवा हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटिज जैसी बीमारियों में कारगर साबित होती है जबकि प्रोटोकॉल के अनुसार इस दवा का ऐसा कोई ट्रायल नहीं किया गया है. इसे लेकर फैबिफ्लू का कोई डेटा उपलब्ध नहीं है.'
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सीडीएससीओ ने कहा कि एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स ने फैबिफ्लू की कीमत 103 रुपये प्रति टैबलेट बताई थी. कंपनी के दावे के मुताबिक एक मरीज को फैबिफ्लू टैबलेट 14 दिन तक लेनी है. इसका मतलब है कि एक मरीज को लगभग 122 गोलियां लेनी होंगी. इस तरह इलाज पर कुल खर्च करीब 12,500 रुपये आएगा.
मिलन शर्मा