वैज्ञानिक का दावा, सांस लेने और बोलने से भी फैल सकता है कोरोना वायरस

अमेरिका के एक वैज्ञानिक का दावा है कि कोरोना वायरस कफ, खांसी और बुखार के अलावा सांस के जरिए भी फैल सकता है.

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सिर्फ बात करने से भी फैल सकता है कोरोना सिर्फ बात करने से भी फैल सकता है कोरोना

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 अप्रैल 2020,
  • अपडेटेड 8:08 AM IST

कोरोना वायरस मामले लगातार बढते जा रहे हैं और इसे लेकर तरह-तरह की स्टडीज की जा रही हैं. कोरोना वायरस के आम लक्षणों में सर्दी, खांसी, बुखार,सांस में दिक्कत और गले में खराश जैसी समस्याएं है. इन लक्षणों के अलावा सांस लेने और बोलने से कोरोना वायरस फैल सकता है. ये दावा अमेरिका के एक वैज्ञानिक ने किया है.

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ में इन्फेक्शस डिजीज के प्रमुख एंथोनी फॉसी ने अमेरिका के न्यूज चैनल Fox News को बताया, 'हाल ही में मिली सूचनाओं के आधार पर ये बात सामने आई है कि कफ और खांसने के अलावा ये वायरस सिर्फ बात करने से भी फैल सकता है. ' एंथोनी फॉसी ने बीमार लोगों के अलावा आम लोगों से भी मास्क पहनने की अपील की.

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इससे पहले नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (NAS)ने भी व्हाइट हाउस को एक पत्र लिख कर इस रिसर्च के बारे में बताया था. हालांकि एनएएस का कहना था कि इस शोध के नतीजों के बारें में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है लेकिन अभी तक के अध्ययन के अनुसार सांस लेने से इस वायरस का एरोसोलाइजेशन हो सकता है. यानी ये हवा में भी फैल सकते हैं.

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इससे पहले अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसियों का कहना था कि कोरोना वायरस बीमार लोगों के छींकने और खांसने से निकलने वाली छींटों से फैलता है, जो आकार में लगभग आकार में एक मिलीमीटर के होते हैं. न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक हालिया रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया था कि SARS-CoV-2 वायरस एरोसोल बन सकता है और हवा में तीन घंटे तक रह सकता है.

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हालांकि कई वैज्ञानिकों ने इस स्टडी की आलोचना भी की. कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि इस अध्ययन के लिए रिसर्च टीम ने नेबुलाइजर मशीन का इस्तेमाल किया, ताकि जानबूझकर वायरल धुंध बनाई जा सके जबकि स्वाभाविक रूप से ये संभव नहीं है.

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