कोरोना: HCQ को खतरा बताने वाले रिसर्चर्स का यू-टर्न, वापस ली स्टडी

कोरोना वायरस के इलाज में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को लेकर पूरी दुनिया में हल्ला मचा है. कुछ ने इस दवा के इस्तेमाल को खतरा बताया तो क‍िसी ने इसे कोरोना से लड़ने में कारगार बताया. लेकिन अब इस दवा को खतरा बताने वाले रिसर्चर्स ने अपना दावा वापस ले लिया है.

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Hydroxychloroquine (Getty Image) Hydroxychloroquine (Getty Image)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 जून 2020,
  • अपडेटेड 5:09 PM IST

  • हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा के इस्तेमाल को लेकर स्टडी
  • 3 रिसर्चर्स ने अपनी स्टडी को वापस लेने की घोषणा की

कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल की जा रही मलेरिया-रोधी दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को लेकर पूरी दुनिया में हल्ला मचा है. कुछ ने इस दवा के इस्तेमाल को खतरा बताया तो क‍िसी ने इसे कोरोना से लड़ने में कारगार बताया. लेकिन अब इस दवा को खतरा बताने वाले रिसर्चर्स ने अपना दावा वापस ले लिया है. साइंस जर्नल लैंसेट में अपनी स्टडी पब्लिश करने वाले चार रिसर्चर्स में से तीन ने गुरुवार को ये घोषणा की. इन सभी ने इस दवा को लेकर एक बड़ी स्टडी की थी और कहा था कि इस दवा से कोविड-19 के इलाज में कोई खास मदद नहीं मिलेगी.

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96 हजार मरीजों के रिकॉर्ड का विश्लेषण

इन चार रिसर्चर्स ने कहा था कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन से मरीज की अस्पताल में मौत होने की आशंका बढ़ जाती है. अपनी स्टडी वापस लेने के पीछे इन रिसर्चर्स ने एक हेल्थकेयर कंपनी को वजह बताया है. इस रिसर्च में 96 हजार मरीजों के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया था, जिसमें पाया गया था कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और क्लोरोक्वीन के इस्तेमाल से कोरोना के खिलाफ कोई मदद नहीं मिलती. यह मलेरिया-रोधी दवा हार्ट एरिथिमिया कंडीशन होने की आशंका बढ़ा देती है, जिसके चलते मरीज की अस्पताल में ही मौत हो सकती है.

क्यों वापस ले रहे रिसचर्स इस स्टडी को?

अब रिसर्चर्स की ओर से कहा गया है कि ऐसी स्थिति में अब उन्हें जो प्राइमरी रिसर्च में डेटा सोर्स मिला है, उसकी पुष्टि नहीं की जा सकती. ऐसे में रिसचर्स इस स्टडी को वापस ले रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने यह रिसर्च कोविड-19 महामारी में सच्ची मदद के लिए की थी, लेकिन वो इसमें नाकाम रहे हैं इसलिए माफी मांगते हैं.

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वैज्ञानिकों की बढ़ी चिंता

इस रिसर्च के सामने आने के बाद वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने इस दवा के क्लिनिकल ट्रायल्स को लेकर रोक लगा दी थी, लेकिन इसके बाद वैज्ञानिकों के बीच इस बात को लेकर चिंता बढ़ने लगी कि कई देश और अस्पताल कोरोना वायरस पर सही या पूरी जानकारी नहीं उपलब्ध करा रहे हैं.

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