भारत में भी कोरोना का प्रकोप बढ़ रहा है. लेकिन उससे भी बड़ी समस्या है लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों की, जो रोजी-रोटी छिनने के बाद सैकड़ों किलोमीटर पैदल ही सड़कों पर देखे जा रहे हैं. वैसे केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों से उनकी मदद को कहा है, लेकिन सवाल है कि कष्टकारी यात्रा सिर्फ निर्देश जारी कर देने भर से नहीं रुकती.
दिल्ली नोएडा बॉर्डर पर सैकड़ों मजदूर घर जाने के लिए निकले हैं और सड़क पर बैठे हैं. चीन से आई महामारी फैली है. घर में बैठना ही बचने का रास्ता है, लेकिन इन मजदूरों के पास वहां कोई छत नहीं जहां ये कल तक कमाते-खाते थे.
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किसी की क्या मजबूरी हो सकती है कि गैस टैंकर की छत पर बैठे और सैकड़ों किलोमीटर बस भागता चला जाए? राजस्थान के भरतपुर में जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे पर गैस टैंकर पर सवारी कर रहे यूपी के मजदूर नजर आए. ये मजदूर राजस्थान की फैक्ट्रियों में काम करते थे.
तालाबंदी में अपने-अपने गांव भागते मजदूरों में हो सकता है कि कुछ सिर्फ बदहवाश होकर निकल पड़े हों. लेकिन अधिकतर की मजबूरी ऐसी है कि बाहर भले संक्रमण का खतरा हो, लेकिन रुकने का कोई इंतजाम नहीं, क्योंकि तालाबंदी में उनकी फैक्ट्रियों ने उन्हें नमस्ते कह दिया है.
ये मजदूर जब बेबस हो कर अपने-अपने शहरों की ओर जा रहे हैं तो संक्रमण से बचने के उपाय की अनदेखी हो रही है. ये भी देखा गया कि राजस्थान के राजसमंद में मालढुलाई के वाहन में कैसे ठूंस-ठूंस कर लोगों को भरा गया.
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इन हालातों को देखते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी में मजदूरों की मदद करने की सरकार से अपील की. प्रियंका गांधी ने कहा कि दिल्ली के बॉर्डर पर त्रासद स्थिति पैदा हो चुकी है. हजारों की संख्या में लोग पैदल अपने घरों की तरफ निकल पड़े हैं. कोई साधन नहीं, भोजन नहीं. कोरोना का आतंक, बेरोजगारी और भूख का भय इनके पैरों को घर गांव की ओर धकेल रहा है. मैं सरकार से प्रार्थना करती हूं कि कृपया इनकी मदद कीजिए.
मदद का दिया भरोसा
वैसे जब मजदूरों की ये कष्ट यात्रा जारी है तो यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मजदूरों की मदद का निर्देश प्रशासन को दिया है. बिहार सरकार भी भरोसा दिला रही है कि सभी मजदूरों की मदद की जाएगी. लेकिन असली मदद अगर कहीं से मिल रही तो निजी प्रयासों से ही मिल रही है.
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