ओडिशा की विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा को लेकर मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने आज शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की और रथ यात्रा को लेकर चर्चा भी की.
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पुरी के राजा (गजपति) ने कहा कि लॉकडाउन के कारण श्रीमंदिर के बाहर कोई धार्मिक अनुष्ठान नहीं कराया जा सकता. इसके बाद कोरोना प्रकोप को देखते हुए इस बार की ऐतिहासिक रथ यात्रा पर अनिश्चितता और बढ़ गई है. हालांकि रथ यात्रा को लेकर अंतिम फैसला लिया जाना है.
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यह विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा हर साल निकाली जाती है जिसमें दुनियाभर के 8 लाख से ज्यादा लोग शामिल होते हैं और भगवान जगन्नाथ की पूजा करते हैं.
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दो महीने चलता है धार्मिक अनुष्ठान
आंतरिक धार्मिक अनुष्ठान मई महीने से ही शुरू हो जाती हैं और दो महीने तक चलता है, लेकिन रथ यात्रा इस अनुष्ठान का खास आकर्षण होता है और इसके लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं.
हालांकि इस साल कोरोना वायरस को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार लोगों से सामाजिक दूरी बनाए रखने को कह रही है और खुद की कोशिश है कि लोगों को एकत्र होने से रोका जाए.
इससे पहले कामाख्या मंदिर में होने वाला प्रसिद्ध वार्षिक अंबुबाची मेला भी रद्द कर दिया गया है.
केदारनाथ के कपाट 29 अप्रैल को खुलेंगे
हालांकि कोरोना वायरस के खिलाफ जारी जंग के बीच 29 अप्रैल से केदारनाथ के कपाट खुलने जा रहे हैं, कपाटोद्घाटन मेष लग्न में सुबह 6.10 बजे पर होगा. जबकि बद्रीनाथ के कपाट 15 मई को खुलेंगे.
पहले 29 अप्रैल को केदारनाथ और 30 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने थे, लेकिन अब बद्रीनाथ के कपाट 15 मई, जबकि केदारनाथ के कपाट तय तिथि पर ही खुलेंगे. वहीं, 26-27 अप्रैल से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट भी खुल जाएंगे.
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