कांग्रेस सांसद राहुल गांधी कोरोना वायरस के कहर और इस वायरस की वजह से देश में लगे लॉकडाउन की वजह से हुए आर्थिक नुकसान को लेकर आज मंगलवार सुबह 9 बजे नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी से बातचीत करेंगे. इससे पहले राहुल गांधी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन से भी बातचीत कर चुके हैं.
कोरोना वायरस और लॉकडाउन को लेकर राहुल गांधी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर लगातार हमलावर हैं और सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं.
अब इसी कड़ी में राहुल गांधी आज मंगलवार को नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी से कोरोना की वजह से लगे लॉकडाउन से आर्थिक नुकसान और सरकार की नीतियों पर चर्चा कर सकते हैं.
इससे पहले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले दिनों इन्हीं चुनौतियों को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन से भी चर्चा की थी. इस चर्चा में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर बड़े सवाल खड़े किए थे.
केंद्र को दिग्गजों का सुझाव
देश में लॉकडाउन की वजह से 24 मार्च से सब कुछ बंद है, जिससे हर रोज बड़ा नुकसान हो रहा है. हालांकि लॉकडाउन के तीसरे चरण में कुछ ढील के साथ शुरुआत की गई है. भारत में पहले से ही अर्थव्यवस्था और नौकरियों को लेकर चिंताएं हैं. अब कोरोना संकट से और गहरा गया है.
पिछले महीने भारतीय मूल के 3 बड़े अर्थशास्त्री आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन, नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन और नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी ने एक लेख के जरिए केंद्र सरकार को कुछ अहम सुझाव दिए थे.
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कम टेस्टिंग पर सवाल
तब राहुल गांधी ने कोरोना टेस्टिंग को लेकर सवाल किया. इस पर रघुराम राजन ने कहा कि अगर हम अर्थव्यवस्था को खोलना चाहते हैं, तो टेस्टिंग की क्षमता को बढ़ाना होगा. हमें मास टेस्टिंग की ओर जाना होगा. अमेरिका की मिसाल लें. वहां एक दिन में डेढ़ लाख तक टेस्ट हो रहे हैं. लेकिन वहां विशेषज्ञों, खासतौर से संक्रमित रोगों के विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षमता को तीन गुना करने की जरूरत है यानी 5 लाख टेस्ट प्रतिदिन हों तभी आप लॉकडाउन को खोलने के बारे में सोचें.
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राजन ने राहुल गांधी से कहा था कि कुछ तो रोज 10 लाख तक टेस्ट करने की बात कर रहे हैं. भारत की आबादी को देखते हुए हमें इसके चार गुना टेस्ट करने चाहिए. अगर आपको अमेरिका के लेवल पर पहुंचना है तो हमें 20 लाख टेस्ट रोज करने होंगे, लेकिन हम अभी सिर्फ 22-30 हजार टेस्ट ही कर पा रहे हैं.
सत्ता के केंद्रीयकरण पर निशाना
राहुल गांधी ने रघुराम राजन से सवाल किया कि क्या सत्ता का केंद्रीकरण हो गया है, जिससे बातचीत लगभग बंद हो गई है. बातचीत और संवाद से कई समस्याओं का समाधान निकलता है. इस पर जवाब देते हुए राजन ने कहा कि विकेंद्रीकरण न सिर्फ स्थानीय सूचनाओं को सामने लाने के लिए जरूरी है बल्कि लोगों को सशक्त बनाने के लिए भी अहम है.
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राजन ने आगे कहा कि पूरी दुनिया में इस समय यह स्थिति है कि फैसले कहीं और किए जा रहे हैं. मेरे पास एक वोट तो है दूरदराज के किसी व्यक्ति को चुनने का. मेरी पंचायत हो सकती है, राज्य सरकार हो सकती है, लेकिन लोगों में यह भावना है कि किसी भी मामले में उनकी आवाज नहीं सुनी जाती.
नौकरियों पर पड़ने वाले असर
राहुल गांधी ने सवाल किया कि कोरोना संक्रमण से नौकरियों पर क्या असर पड़ेगा. इस पर जवाब देते हुए राजन ने कहा कि आंकड़े बहुत ही चिंतित करने वाले हैं. सीएमआईई के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि कोरोना संकट के कारण करीब 10 करोड़ और लोग बेरोजगार हो जाएंगे.
उन्होंने आगे कहा कि 5 करोड़ लोगों की तो नौकरी जाएगी, करीब 6 करोड़ लोग श्रम बाजार से बाहर हो जाएंगे. आप किसी सर्वे पर सवाल उठा सकते हो, लेकिन हमारे सामने तो यही आंकड़े हैं. यह आंकड़े बहुत व्यापक हैं. इससे हमें सोचना चाहिए कि नापतौल कर हमें अर्थव्यवस्था खोलनी चाहिए, लेकिन जितना तेजी से हो सके, उतना तेजी से यह करना होगा जिससे लोगों को नौकरियां मिलना शुरू हों.
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