भारत बायोटेक की कोवैक्सीन में गाय के बछड़े के सीरम शामिल होने का विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. बीते दिन कांग्रेस नेता के एक सवाल पर स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत बायोटेक सफाई दे चुके हैं कि फाइनल प्रोडक्ट में ऐसा कुछ नहीं होता है. अब इस मामले में एनिमल राइट ऑर्गनाइज़ेशन PETA की एंट्री हुई है.
PETA की ओर से ड्रग्स कंट्रोलर ऑफ इंडिया को लिखा गया है कि कोवैक्सीन को डेवलेप करने के तरीके को बदला जाए और किसी भी जानवर का इस्तेमाल ना किया जाए.
गुरुवार को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया को भेजे गए संदेश में PETA द्वारा अपील की गई है कि बछड़े के सीरम की जगह किसी अन्य चीज़ का इस्तेमाल किया जाए, ताकि जानवरों को नुकसान ना हो और वैक्सीन का प्रोडक्शन भी हो जाए.
PETA ने मांग की है कि DCGI की ओर से आश्वासन दिया जाना चाहिए कि वैक्सीन निर्माता ऐसा नहीं करेंगें. पेटा का कहना है कि जिस बछड़े के सीरम का इस्तेमाल किया जाता है, उसे जन्म के कुछ वक्त बाद ही उसकी मां से जुदा कर दिया जाता है.
PETA की ओर से कुछ नियमों का भी हवाला दिया गया, जिसमें 3 महीने से कम उम्र वाले बछड़े को मारने पर रोक की बात की गई है.
बीते दिन मचा था काफी बवाल
गौरतलब है कि बीते दिन कांग्रेस नेता द्वारा आरोप लगाया गया था कि कोवैक्सीन बनाने में बछड़े के सीरम का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, भारत बायोटेक ने साफ किया था कि फाइनल प्रोडेक्ट में ऐसा कुछ नहीं होता है. लेकिन, वेरो कोशिकाओं की प्रोडक्शन स्टेज पर इस्तेमाल किया जाता है, यही फॉर्मूला दुनियाभर में वैक्सीन बनाने के लिए लागू होता है. इन आरोपों के बाद कांग्रेस और भाजपा में भी राजनीतिक जंग शुरू हो गई थी.
आशीष पांडेय