बीते साल 24 अक्टूबर को एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया और रिलायंस जियो समेत अन्य टेलीकॉम कंपनियों को बड़ा झटका लगा था. दरअसल, इस दिन सुप्रीम कोर्ट ने इन टेलीकॉम कंपनियों को सरकार की बकाया रकम (एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू- AGR) चुकाने का आदेश दिया.
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने 23 जनवरी 2020 तक की डेडलाइन भी तय कर दी थी. अब ये डेडलाइन खत्म हो गई है. इस समय तक एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया ने बकाये के भुगतान नहीं किये हैं. वहीं मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस जियो ने 195 करोड़ रुपये का भुगतान किया है.
ये भी पढ़ें - खत्म होने वाली है AGR पेमेंट की डेडलाइन, टेलीकॉम कंपनियां करेंगी भुगतान?
अब आगे क्या होगा?
बकाये का भुगतान नहीं करने वाली टेलीकॉम कंपनियों को सरकार की ओर से मामूली राहत मिली है. दरअसल, टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने इन कंपनियों के खिलाफ फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं करने का फैसला लिया है. डिपार्टमेंट ने टेलीकॉम कंपनियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में भुगतान की डेडलाइन बढ़ाने को लेकर दायर याचिका को देखते हुए ये फैसला लिया है.
दरअसल, भारती एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया ने टेलीकॉम डिपार्टमेंट को पत्र भेजकर कहा था कि वे 88,624 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान निर्धारित समयसीमा में नहीं करेंगी. कंपनियां इस भुगतान के संबंध में समयसीमा बढ़ाने को लेकर उच्चतम न्यायालय में दायर याचिका पर होने वाली सुनवाई का इंतजार करेंगी.
यहां बता दें कि बीते मंगलवार को टेलीकॉम कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर डेडलाइन बढ़ाने की मांग की थी. इस मामले की अगले हफ्ते सुनवाई होने वाली है. इससे पहले टेलीकॉम कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट से फैसले पर विचार करने के लिए के लिए याचिका दायर की थी. इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था.
नॉन-टेलीकॉम कंपनियों को राहत!
इस बीच, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि गेल, ऑयल इंडिया और पावर ग्रिड जैसे नॉन-टेलीकॉम कंपनियों पर एजीआर की मद में कोई बकाया नहीं बनता है. धर्मेंद्र प्रधान ने इसे ‘गलतफहमी’ करार दिया है. यहां बता दें कि टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने गेल इंडिया से 1.72 लाख करोड़ रुपये, ऑयल इंडिया से 48,000 करोड़ रुपये, पावर ग्रिड से 40,000 करोड़ रुपये, गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर्स से 15,019 करोड़ रुपये और रेलटेल जैसी कुछ अन्य कंपनियों से बकाया भुगतान करने को कहा है. वहीं इन कंपनियों ने टेलीकॉम डिपार्टमेंट का नोटिस मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट में स्पष्टीकरण दिये जाने को लेकर याचिका दायर की है.
ये भी पढ़ें - टेलीकॉम कंपनियों को चुकाने होंगे 1 लाख करोड़ से ज्यादा
क्या होता है एजीआर ?
टेलीकॉम कंपनियों और सरकार के बीच एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू यानी एजीआर का विवाद 14 साल पुराना है. टेलीकॉम मिनिस्ट्री के डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम द्वारा कंपनियों से लिए जाने वाले यूजेज और लाइसेंसिग फीस को एजीआर कहते हैं. इसके दो हिस्से होते हैं- स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज और लाइसेंसिंग फीस, जो क्रमश 3-5 फीसदी और 8 फीसदी होता है.
aajtak.in