2 लाख शेल कंपनियों पर शिकंजा कसने के बाद अब सरकार की नजर उनके ऑडिटर्स पर है. टैक्स अथॉरिटी अब यह जांच करने में जुट गई है कि कहीं इन कंपनियों के अवैध लेनदेन को ऑडिटर्स ने लीगल बनाने में कोई भूमिका तो नहीं निभाई है. मंगलवार को ऐसे 1 लाख डायरेक्टर्स की पहचान की गई थी, जो शेल कंपनियों से जुड़े हुए थे.
अवैध लेनदेन में भागीदारी का है शक
सूत्रों ने बताया कि अब ऑडिटर्स पर भी नकेल कसने की तैयारी हो रही है. उनके मुताबिक इतनी शेल कंपनियों के अवैध ट्रांजैक्शन को लेकर किसी भी ऑडिटर ने कभी शिकायत नहीं की. ऐसे में यह देखा जाएगा कि कहीं इन मामलों में ये लोग भी तो शामिल नहीं थे.
कई मामले आए हैं सामने
अवैध लेनदेन के कई मामले सामने आए हैं. इसमें लिस्टेड कंपनियों में भी वित्तीय लेनदेन में गड़बड़ी सामने आई है. सूत्रों ने कहा कि फाइनेंशियल स्टेटमेंट में गड़बड़ियां, नेटवर्थ में भारी कमी, ग्रुप और प्रमोटर कंपनियों के फंड में हेराफेरी समेत कई मामलों में ऑडिटर्स की भूमिका होने की जांच की जाएगी.
सेबी की भी है नजर
2 लाख से ज्यादा कंपनियों के सामने आने के बाद टैक्स अथॉरिटी, मार्केट रेग्युलेटर सेबी समेत अन्य रेग्युलेटरी अथॉरिटीज ऐसी कंपनियों पर नजर रखे हुए है. इनकी गतिविधियां लगातार स्कैन की जा रही हैं. सूत्रों ने बताया कि वित्त मंत्रालय समेत अन्य अथॉरिटीज ऑडिटर्स की भूमिका की गहराई से जांच कर रही हैं.
लंबे समय से बंद कंपनियों की हो रही जांच
मिनिस्ट्री समेत अन्य जांच एजेंसी उन कंपनियों की खासकर जांच कर रही हैं, जो काफी लंबे समय से काम नहीं कर रही हैं. ऑडिटर्स की विस्तार से जांच करने के बाद सरकार अगला एक्शन लेने पर विचार करेगी.
विकास जोशी