आर्थ‍िक सुस्ती की चोट: पिछले साल निजी क्षेत्र की सैलरी में एक दशक की सबसे कम बढ़त

आर्थ‍िक सुस्ती और बड़ी संख्या में बेरोजगारी की वजह से कंपनियां अपने कर्मचारियों के वेतन में ज्यादा बढ़ोतरी से हिचक रही हैं. साल 2018-19 में निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की सैलरी में बढ़त पिछले एक दशक में सबसे कम हुई है.

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सैलरी में कम बढ़त हुई बढ़त सैलरी में कम बढ़त हुई बढ़त

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 अगस्त 2019,
  • अपडेटेड 12:59 PM IST

अर्थव्यवस्था में सुस्ती की वजह से भारतीय कंपनियों की तरक्की की रफ्तार सुस्त पड़ गई है. इसकी वजह से कंपनियां अपने कर्मचारियों के वेतन में ज्यादा बढ़ोतरी से हिचक रही हैं. साल 2018-19 में निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की सैलरी में बढ़त पिछले एक दशक में सबसे कम हुई है.

सेंटर फॉर मॉनीटरिंग इंडियन इकोनॉमी द्वारा तैयार प्रोवेस डेटाबेस से यह जानकारी सामने आई है. इसमें 4,953 कंपनियों की बिक्री और वेतन का पिछले 10 साल का आंकड़ा संयोजित किया गया है. इनमें से 3,353 कंपनियों में साल 2018-19 में 82 लाख लोग कार्यरत थे. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक साल 2018-19 में इन 4,953 कंपनियों के नॉमिनल वेतन और बिक्री आय में क्रमश: 6 और 9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. यानी अगर महंगाई के असर को देखें तो (कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स) तो कर्मचारियों के वेतन में बढ़त महज 0.53 फीसदी रही है.

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क्यों नहीं हो रही वेतन में पर्याप्त बढ़ोतरी

निजी क्षेत्र के वेतन में पर्याप्त बढ़ोतरी न हो पाने की कई वजह हैं. काफी समय से कंपनियों का कारोबार अच्छा नहीं चल रहा. प्रोवेस डेटाबेस में शामिल कंपनियों की पिछले चार साल से वास्तविक बिक्री में बढ़त नेगेटिव रही है. साल 2016-17 और 2017-18 में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन पिछले साल फिर हालत खराब हो गई. महंगाई के आधार पर समायोजित बिक्री को देखें तो 2017-18 के 4.5 फीसदी के मुकाबले 2018-19 में घटकर 3 फीसदी रह गई है. इसकी वजह से कंपनियां लागत में कटौती जैसे उपाय कर रही हैं और वेतन में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं की जा रही.

इसके अलावा कंपनियों द्वारा वेतन में बढ़ोतरी न करने की एक वजह बढ़ती बेरोजगारी भी है. नेशनल सेम्पल सर्वे ऑफिस द्वारा किए गए पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) पता चलता है कि 2017-18 में बेरोजगारी दर चार दशक के सबसे ऊंचे स्तर 6.1 फीसदी तक पहुंच गई. बेरोजगारों और योग्य कैंडिडेट की प्रचुर उपलब्धता की वजह से कंपनियों की मोलतोल की क्षमता बढ़ गई है और वे वेतन बढ़ाने से बच रही हैं.

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आंकड़ों के अनुसार, इन 4,953 कंपनियों का पिछले साल कुल वेतन खर्च 10.26 लाख करोड़ रुपये रहा है, जो देश के कुल निजी क्षेत्र के खर्च का करीब 12.8 फीसदी है.

अर्थव्यवस्था पर ये होगा असर

बिक्री से आय में कम बढ़त, वेतन में कम बढ़त और ऊंची बेरोजगारी दर मिलकर किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए बहुत खतरनाक दुष्चक्र बनाते हैं. कम वेतन बढ़त से मांग में कमी आती है और भविष्य में कंपनियों की आय बढ़त भी कम ही रहने की आशंका होती है. वेतन में कम बढ़त की वजह से ही शायद लोग चाहते हुए भी कारें, कपड़े और अन्य कम जरूरी चीजें नहीं खरीद रहे और इस वजह से इस साल ऑटो और टेक्सटाइल सेक्टर की हालत बेहद खराब रही है.

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