आर्थिक सुस्‍ती के बाद भी वित्तीय प्रणाली स्थिर, RBI की रिपोर्ट में खुलासा

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट (एफएसआर) रिपोर्ट पेश की है. इस रिपोर्ट में देश की आर्थिक स्थिति के बारे में जानकारी दी गई है.

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RBI ने फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट रिपोर्ट पेश की RBI ने फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट रिपोर्ट पेश की

aajtak.in

  • नई दिल्‍ली,
  • 27 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 3:44 PM IST

  • आर्थिक विकास दर में सुस्‍ती के बावजूद वित्तीय प्रणाली स्थिर
  • आरबीआई की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट में खुलासा

देश की आर्थिक विकास दर में सुस्‍ती के बावजूद वित्तीय प्रणाली स्थिर बनी हुई है. यह जानकारी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी ताजा फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट (एफएसआर) में दी है. आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) के री-कैपिटलाइजेशन के बाद बैंकिंग क्षेत्र की तरलता में सुधार हुआ है. हालांकि वैश्विक और घरेलू आर्थिक अनिश्चितताओं के अलावा राजनीतिक घटनाक्रमों से जोखिम बरकरार है. आरबीआई ने कहा कि अगले नौ महीने में बैंकों के फंसे कर्ज (NPA) में और वृद्धि हो सकती है.

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क्‍या कहते हैं आंकड़े

आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2019 में सालाना आधार पर कॉमर्शियल बैंकों (SCBs) की क्रेडिट ग्रोथ 8.7 फीसदी रही. हालांकि निजी क्षेत्र के बैंकों ने दोहरे अंक की क्रेडिट ग्रोथ दर्ज की है. इस दौरान निजी क्षेत्र के बैंकों की ग्रोथ 16.5 फीसदी थी. रिपोर्ट में बताया गया है कि मार्च और सितंबर 2019 के बीच  कॉमर्शियल बैंकों की सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (GNPA) अनुपात 9.3 फीसदी पर स्थिर रही. इसके अलावा रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्रीय बैंक ने टास्क फोर्स की कुछ प्रमुख सिफारिशों को स्वीकार किया है. इसके साथ ही बैंकों की कार्यप्रणाली और एनपीए से जुड़े मुद्दों पर सख्‍ती बरती गई है.

एनबीएफसी की संपत्तियों की गुणवत्ता में गिरावट

रिपोर्ट के मुताबिक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की संपत्तियों की गुणवत्ता में चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों के दौरान गिरावट आई है. इनकी एकीकृत गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (जीएनपीए) का अनुपात मार्च 2019 के 6.1 फीसदी से बढ़कर सितंबर 2019 में 6.3 फीसदी पर पहुंच गया. हालांकि इस दौरान एनबीएफसी का शुद्ध एनपीए 3.4 फीसदी पर स्थिर रहा. इस दौरान एनबीएफसी की पूंजी और संकटग्रस्त संपत्ति का अनुपात (सीआरएआर) 20 फीसदी से कम होकर 19.5 फीसदी पर आ गया.

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इसके अलावा बैंकों में धोखाधड़ी के सूचित मामले चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के अंत तक 1.13 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गए. इसमें बैंकों को कुछ मामलों का पता देरी से लगा है. रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2018-19 में बैंकों ने कुल 71,543 करोड़ रुपये के 6,801 धोखाधड़ी के मामलों की सूचना दी थी. 

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