जाते-जाते विरल आचार्य ने मोदी सरकार को दिया यह बड़ा सुझाव

मंगलवार को विरल आचार्य का RBI के डिप्टी गवर्नर के तौर पर आखिरी दिन है. विरल का कहना है कि सरकार को उन सब्सिडी वाली योजनाओं के बारे में सोचना चाहिए, जो किसी तरह का फायदा नहीं दे रहा है.

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विरल आचार्य का डिप्टी गवर्नर के तौर पर मंगलवार को आखिरी दिन (Photo: File) विरल आचार्य का डिप्टी गवर्नर के तौर पर मंगलवार को आखिरी दिन (Photo: File)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 जुलाई 2019,
  • अपडेटेड 7:19 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य अपना कार्यकाल खत्म होने से 6 महीने पहले मंगलवार यानी आज से केंद्रीय बैंक से अलग होने जा रहे हैं. लेकिन जाते-जाते उन्होंने केंद्र सरकार को अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ा सुझाव दिया है.

दरअसल मंगलवार को विरल आचार्य का RBI के डिप्टी गवर्नर के तौर पर आखिरी दिन है. विरल का कहना है कि सरकार को उन सब्सिडी वाली योजनाओं के बारे में सोचना चाहिए, जो किसी तरह का फायदा नहीं दे रही हैं. एक तरह से उनका कहना है कि सरकार को ऐसी योजनाएं बंद कर देनी चाहिए.

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इसके अलावा उन्होंने सलाह दी है कि घाटे वाली सरकारी कंपनियों में से सरकार अपनी हिस्सेदारी खत्म कर दे, ताकि निजी सेक्टर इसमें निवेश कर सके. इससे सरकार पर जो बोझ बढ़ रहा है, वह कम हो जाएगा.

विरल आचार्य ने कहा कि साल 2000 के बाद उत्पादन के मुकाबले भारत का कर्ज 67 फीसदी से बढ़कर 85 फीसदी हो गया है, जो कि किसी उभरते हुए बाजार से अधिक है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विदाई से ठीक पहले आचार्य ने यह भी कहा कि सरकारी कर्ज बढ़ने से डेट बाजार पर दबाव का जोखिम बढ़ सकता है और इससे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाएं पैदा हो सकती हैं. इससे कंपनियों के लिए कर्ज और महंगा हो जाएगा.

आचार्य का महंगाई को लेकर हमेशा सख्त रवैया रहा है. उन्होंने कई बार ब्याज दरों में कटौती के फैसलों पर असहमति भी भी दर्ज कराई थी. RBI में आचार्य की नियुक्ति के दौरान ही नीतिगत दर तय करने का काम 6 सदस्यीय समिति (मौद्रिक नीति समिति) को दे दिया गया था. आचार्य न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के स्टेर्म स्कूल ऑफ बिजनेस में प्रोफेसर हैं और वह निजी वजहों का हवाला देकर RBI से अलग हो रहे हैं. आचार्य ने तीन साल के लिए आरबीआई के बतौर डिप्‍टी गवर्नर 23 जनवरी 2017 को ज्‍वाइन किया था.

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दरअसल, बीते कुछ महीनों से डिप्‍टी गवर्नर विरल आचार्य आरबीआई के नए गवर्नर शक्‍तिकांत दास के फैसलों से अलग विचार रख रहे थे. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पिछली दो मॉनिटरिंग पॉलिसी की बैठक में महंगाई दर और ग्रोथ रेट के मुद्दों पर विरल आचार्य के विचार अलग थे.

गौरतलब है कि इससे पहले आरबीआई की स्वायत्तता सहित कई मुद्दों पर सरकार के साथ बढ़ते मतभेदों के बीच उर्जित पटेल ने गवर्नर पद से दिसंबर 2018 में इस्तीफा दे दिया था. पटेल के इस्तीफे के बाद शक्तिकांत दास को गवर्नर नियुक्त किया गया था.

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