अपने पिता राहुल बजाज की तरह बजाज ऑटो के एमडी राजीव बजाज भी खुलकर 'सच बोलने' के रास्ते पर चल पड़े हैं. कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ संवाद में उन्होंने लॉकडाउन और सरकारी प्रयासों पर खुलकर अपनी राय रखी और कहा कि वे सच बोलने से नहीं डरते.
उन्होंने कहा, 'एक व्यक्ति के रूप में हम बहुत खुले हैं. हमारा देश खुलापन वाला देश है, इसे हमे खत्म नहीं करना होगा चाहे सरकार के लिए हो या कारोबार के लिहाज से.' गौरतलब है कि राजीव बजाज के पिता राहुल बजाज भी कई मौकों पर तीखे सवालों से सरकारों को घेरते रहे हैं. कॉरपोरेट जगत में वह तीखे सवाल करने के लिए मशहूर हैं, जबकि आमतौर पर कॉरपोरेट-इंडस्ट्री के लोग सरकार से सवाल नहीं कर पाते.
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कोरोना संकट के बीच चरमराती दिख रही अर्थव्यवस्था के मसले पर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं, इस बीच राहुल एक्सपर्ट्स से भी बात कर रहे हैं. एक्सपर्ट्स से चर्चा करने की इसी कड़ी में राहुल गांधी ने आज बजाज ऑटो के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव बजाज से बात की.
इस दौरान राजीव बजाज ने कहा कि लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था को बहुत गहरी चोट पहुंची है और लोगों में इसको लेकर काफी डर बना हुआ है. वहीं राहुल गांधी ने कहा कि अब जब स्थिति बिगड़ गई है तो केंद्र ने राज्यों को उनके हाल पर छोड़ दिया है.
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राहुल से बात पर लोगों ने डराया!
राहुल गांधी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सहिष्णुता कम हुई है. राहुल गांधी ने कहा कि जब मैंने एक व्यक्ति से कहा कि मैं आपसे बात करने जा रहा हूं तो उसने कहा कि बंदे में दम है. इस पर राजीव ने कहा कि मैंने भी किसी को बताया कि मैं राहुल गांधी से बात करने जा रहा हूं तो उसने कहा, 'मत करो ऐसा आपको परेशानी हो सकती है.' उन्होंने कहा कि मैंने सारी बातें कई मीडिया चैनलों पर कही है. अब गलती है तो यह हो चुकी है. क्या हम राहुल गांधी से बिजनेस, लॉकडाउन, अर्थव्यवस्था, मोटरसाइकिलों पर भी बात नहीं कर सकते. फिर उस व्यक्ति ने कहा कि आप जोखिम क्यों लेना चाहते हैं?'
राहुल गांधी ने कहा कि क्या कारोबार के लिए डर का माहौल है? तो राजीव ने कहा कि उत्साह नहीं हो तो कोई भी निवेश नहीं करता.
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किस बात से डरते हैं लोग
सवाल यह है कि डर किस बात का है? इस पर राजीव बजाज ने कहा कि हो सकता है कि लोगों को कुछ छिपाने का डर हो. सहिष्णुता और संवदेनशीलता के मामले में मैं कहूंगा कि हमें बहुत कुछ सुधारने की जरूरत है.
दिनेश अग्रहरि