आर्थिक सुस्‍ती के बीच नीति आयोग के CEO बोले- कहानी अभी शुरू हुई है

नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत ने कहा है कि भारत की कहानी अभी शुरू हुई है.

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नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं अमिताभ कांत नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं अमिताभ कांत

aajtak.in

  • नई दिल्‍ली,
  • 14 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 6:55 PM IST

  • अमिताभ कांत ने कहा कि भारत के बारे में सकारात्मक माहौल
  • अमिताभ कांत के मुताबिक भारत की कहानी अभी शुरू हुई है

आर्थिक सुस्‍ती के बीच नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत ने कहा है कि भारत की इकोनॉमी आने वाले दिनों में और मजबूत होगी. न्‍यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत के दौरान अमिताभ कांत ने कहा कि भारत के बारे में काफी सकारात्मक माहौल है.

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अमिताभ कांत ने कहा,  ''माल एवं सेवा कर (जीएसटी) समेत दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता के जरिये क्रोनी पूंजीवाद को समाप्त करना हो या रेरा के जरिये रियल एस्टेट में सुधार करना और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसे उपायों से भारत की इकोनॉमी मजबूत होगी. '' उन्‍होंने आगे कहा कि भारत की कहानी अभी शुरू हुई है.

अमिताभ कांत ने कहा, '' शहरीकरण, बुनियादी संरचना सृजन तथा आगे बढ़ने के लिए प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल की हमारी प्रक्रिया अभी शुरू हुई है. ये जो सुधार किए गए हैं, इनकी बुनियाद पर शानदार वृद्धि की कहानी आप अगले तीन दशकों में देखेंगे.''  देश की जीडीपी 6 साल के निचले स्तर पर पहुंच जाने के बारे में पूछे जाने पर अमिताभ कांत ने कहा कि ये अल्पकालिक सूचकांक हैं और भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की पटरी पर है.

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अमिताभ कांत ने कहा, ‘‘सरकार का लक्ष्य भारत को 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है. हम सभी इस दिशा में काम कर रहे हैं. हम इसे पा लेंगे और भारत दुनिया में सबसे सरल एवं आसान देशों में एक बन जाएगा.’’ उन्होंने आगे कहा कि हम अगले साल तक विश्व बैंक के कारोबार सुगमता सूचकांक में शीर्ष 50 देशों में और अगले तीन साल में शीर्ष 25 देशों में शामिल होने का इरादा बना चुके हैं. यह हासिल करने योग्य लक्ष्य है.

बता दें कि हाल ही में मोदी सरकार में मुख्य आर्थिक सलाहकार रह चुके अरविंद सुब्रमण्यन ने कहा है कि देश की अर्थव्‍यवस्‍था आईसीयू की तरफ बढ़ रही है. उन्‍होंने सरकार को चेताया है कि अगर इसे नहीं संभाला गया तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे.

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