जेल से दूर नहीं जाना चाहतीं मोबाइल कंपनियां, कोर्ट से गुहार

सेल्यूलर आपरेटर्स एसोसिएशन आफ इंडिया ने अपनी अर्जी में राज्य सरकार को इन टावर को सील नहीं करने अथवा नौ मई के आदेश के तहत कोई दण्डात्मक कार्रवाई नहीं करने निर्देश देने का भी अनुरोध किया है.

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राजस्थान की जेल के परिसरों के पांच सौ मीटर के दायरे से हटेंगे मोबाइल टावर राजस्थान की जेल के परिसरों के पांच सौ मीटर के दायरे से हटेंगे मोबाइल टावर

राहुल मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 25 मई 2017,
  • अपडेटेड 2:19 PM IST

राजस्थान की जेल के परिसरों के पांच सौ मीटर के दायरे से आठ जून तक सारे मोबाइल टावर हटाने के राज्य सरकार के आदेश पर रोक के लिये मोबाइल सेवा प्रदाताओं के संगठन ने आज उच्चतम न्यायालय में एक अर्जी दायर की. सेल्यूलर आपरेटर्स एसोसिएशन आफ इंडिया ने अपनी अर्जी में राज्य सरकार को इन टावर को सील नहीं करने अथवा नौ मई के आदेश के तहत कोई दण्डात्मक कार्रवाई नहीं करने निर्देश देने का भी अनुरोध किया है.

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एसोसिएशन अपनी अर्जी में कहा है कि राज्य में जेल परिसरों के पांच सौ मीटर के दायरे में सेल्यूलर आपरेटरों के 400 बेस ट्रांसीवर स्टेशन (बीटीएस) हैं जिनमें बेस स्टेशन नियंत्रक साइट भी शामिल है और ये टावर करीब 80 लाख उपभोक्ताओं को सेवा प्रदान कर रहे हैं. यदि इन टावरों को हटाया गया तो इससे सेवा की गुणवत्ता खराब हो जायेगी.

आवेदन में यह भी कहा गया है कि राजस्थान उच्च न्यायालय के 27 नवंबर, 2012 के फैसले के खिलाफ अपील शीर्ष अदालत में लंबित है. उच्च न्यायालय ने अस्पतालों और स्कूलों से दो महीने के भीतर तथा जेल परिसरों के पांच सौ मीटर के दायरे से इन टावरों को छह महीने के भीतर हटाने का निर्देश दिया था.

एसोसिएशन का दावा है कि जेल परिसरों के पांच सौ मीटर के दायरे से इन टावरों को हटाने संबंधी राज्य सरकार के 31 अगस्त, 2012 के नीतिगत फैसले के स्थान पर राज्य सरकार ने इस साल छह फरवरी को एक नया निर्णय लिया और इस इस तरह इस समय वहां ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं रह गया है.

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अर्जी में यह भी तर्क दिया है कि राज्य सरकार ने नौ मई को जो आदेश दिया वह आदेश उच्च न्यायालय के 6 अप्रैल के आदेश के आलोक में दिया है जो सरकार की 31 अगस्त 2012 की नीति पर आधारित था जो नयी नीति के आने से हट चुकी है.

 

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