'ग्लोबलाइजेशन' ने इकोनॉमी में 'स्लोबलाइजेशन' को बढ़ावा दिया: कुमार मंगलम बिड़ला

आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में 'ग्लोबलाइजेशन' ने वास्तव में 'स्लोबलाइजेशन' यानी आर्थिक सुस्ती के लिए रास्ता बनाया है.

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आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला (फाइल फोटो) आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 जनवरी 2020,
  • अपडेटेड 11:41 AM IST

  • कुमार मंगलम बिड़ला ने ब्लॉग लिखकर जताई चिंता
  • ग्लोबलाइजेशन ने आर्थिक सुस्ती के लिए रास्ता बनाया है
  • राष्ट्रवाद और ग्लोबलाइजेशन के बीच टकराव है प्रमुख ट्रेंड

आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में 'ग्लोबलाइजेशन' ने वास्तव में 'स्लोबलाइजेशन' यानी आर्थिक सुस्ती के लिए रास्ता बनाया है. सोशल मीडिया साइट लिंक्डइन पर लिखे एक ब्लॉगपोस्ट में बिड़ला ने यह बात कही.

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ग्लोबलाइजेशन और राष्ट्रवाद का टकराव

बिड़ला ने कहा कि राष्ट्रवाद और वैश्वीकरण के बीच तनातनी मौजूदा दशक का सबसे प्रमुख ट्रेंड है. उन्होंने लिखा है, वैश्वीकरण और राष्ट्रवाद की संघर्षरत ताकतें सरकारों और कॉरपोरेट को अपनी प्राथमिकता पर नए सिरे से विचार करने के लिए मजबूर कर रही हैं और उन्हें  नई रचनाओं पर मजबूर कर रहे हैं.'  

अरबपति कारोबारी ने कहा, वैश्वीकरण के बाद की दुनिया में लोग और समुदाय विजेता और पराजित के ऐसे खेमे में खुद को पा रहे हैं, जिसकी दूरी लगातार बढ़ती जा रही है. उन्होंने कहा, वैश्वीकरण की तरफ बढ़ना अपरिहार्य हो सकता है, लेकिन यह तो तय है कि दुनिया अब सपाट नहीं रही.

सुस्ती की क्या है वजह

उन्होंने लिखा है, 'इसकी वजह से वैश्विक व्यापार सुस्त हो सकता है, क्योंकि अब अर्थव्यवस्थाएं क्षेत्रीय हो सकती हैं. ग्लोबलाइजेशन ने 'स्लोबलाइजेशन' के लिए रास्ता बनाया है और अब जो ट्रेंड उभर रहा है वह क्षेत्रीय ज्यादा है. उन्होंने आदित्य बिड़ला समूह के विदेशी कारोबार का भी हवाला देते हुए (जैसे नॉवेलिस इंक और बिड़ला कार्बन) बताया कि किस तरह से कंपनियां बदलते वातारण में क्षेत्रीय फोकस बनाए रखते हुए अपने भीतर बदलाव ला रही हैं.

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 बिड़ला ने कहा, 'पिछले साल आदित्य बिड़ला ग्रुप ने अपनी ग्लोबलाइजेशन यात्रा की 50वीं वर्षगांठ मनाई. 1969 में मेरे पिता श्री आदित्य विक्रम बिड़ला ने थाइलैंड में कदम रखने की अगुवाई की, भारतीय अर्थव्यवस्था के औपचारिक रूप से खुलने से 22 साल पहले. उस शुरुआत के बाद आज यह समूह 48.3 अरब डॉलर का ग्लोबल डायवर्सिफाइड बिजनेस ग्रुप बन चुका है, जिसकी 5 महाद्वीपों के 36 देशों में मौजूदगी है और आज समूह का 50 फीसदी से ज्यादा रेवेन्यू ग्लोबल बिजनेस से आता है' 

गौरतलब है कि पिछले साल नवंबर में थाईलैंड आदित्य बिड़ला ग्रुप का स्वर्ण जयंती समारोह मनाया गया था जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शि‍रकत की थी. आईएमएफ के अनुसार वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़त दर 2018 में 3.6 फीसदी और 2019 में करीब 3 फीसदी ही रही.

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