1 फरवरी, 2020 को पेश किए गए बजट में केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2021 में नॉमिनल GDP के 10 फीसदी पर रहने की उम्मीद जताई है. वहीं वित्त वर्ष 2021-22 और 2022-23 में क्रमश: 12.6 फीसदी और 12.8 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है.
मूडीज ने क्या कहा?
इस बीच, मूडीज इन्वेस्टर सर्विस का कहना है कि ये अनुमान महत्वकांक्षी है. मूडीज की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ‘‘भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष संरचनात्मक और चक्रीय चुनौतियों को देखते हुए ये अनुमान महत्वाकांक्षी लगता है.’’ इसमें आगे कहा गया कि वर्ष 2019 में आर्थिक वृद्धि में सुस्ती रही. हम उम्मीद करते हैं कि अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी.’’ मूडीज के मुताबिक गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (एनबीएफआई) के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के कारण ग्रोथ अपेक्षाकृत कमजोर बना हुआ है.
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बजट में नॉमिनल 10% का अनुमान
बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट में 2020-21 के दौरान नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ रेट 10 फीसदी रहने का अनुमान जताया है. उन्होंने कहा कि नए वित्त वर्ष में कुल प्राप्तियां 22.46 लाख करोड़ रुपये तथा कुल व्यय 30.42 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. वहीं चालू वित्त वर्ष 2019-20 के लिए संशोधित अनुमानित व्यय 26.99 लाख करोड़ है, और प्राप्तियां 19.32 लाख करोड़ रुपये आंकी गई हैं. वित्त वर्ष 2019-20 में सरकार की शुद्ध बाजार उधारी 4.99 लाख करोड़ रहेंगी. अगले वित्त वर्ष के दौरान यह बढ़ कर 5.36 लाख करोड़ रुपये तक रहने का अनुमान है.
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क्या होता है नॉमिनल जीडीपी?
दरअसल, जीडीपी दो तरह की होती है नॉमिनल जीडीपी और रियल जीडीपी. नॉमिनल जीडीपी सभी आंकड़ों का एक कच्चा योग होता है, लेकिन रियल जीडीपी में महंगाई के असर को भी समायोजित कर लिया जाता है. यानी अगर किसी वस्तु के मूल्य में 10 रुपये की बढ़त हुई है और महंगाई 4 फीसदी है तो उसके रियल मूल्य में बढ़त 6 फीसदी ही मानी जाएगी. भारत में जो आंकड़े जारी किए जाते हैं वह रियल जीडीपी के होते हैं.
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