दुनियाभर में जनवरी-मार्च 2017 के दौरान गोल्ड की बिक्री में 18 फीसदी गिरावट दर्ज हुई है. लेकिन भारत में इस दौरान गोल्ड की बिक्री 15 फीसदी बढ़ गई. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक साल 2017 की पहली तिमाही में गोल्ड की मांग 15 फीसदी बढ़कर 123.5 टन पर पहुंच गई जबकि 2016 की इस तिमाही में महज 107.3 टन थी.
जुलाई में गोल्ड के लिए बड़ी चुनौती
डब्ल्यूजीसी के मुताबिक भारत में सोने की मांग बढ़ने से गोल्ड इंडस्ट्री में उम्मीद जगी है. हालांकि विश्व गोल्ड काउंसिल का दावा है कि साल 2017 की दूसरी छमाही (जुलाई से दिसंबर) के दौरान देश में गोल्ड कारोबारियों को जीएसटी की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा जिसके चलते सोने की मांग में कमी देखने को मिल सकती है. गौरतलब है कि जुलाई में देश में जीएसटी लागू करने की तैयारी है और इससे गोल्ड ज्वैलरी के क्षेत्र में काम कर छोटे ज्वैलर्स को कड़े नियमों का सामना करना पड़ेगा. इसी आधार पर डब्ल्यूजीसी का अनुमान है कि जुलाई के बाद भारत में गोल्ड की मांग कमजोर पड़ सकती है.
इसे भी पढ़ें: हॉलमार्किग के नए नियमों से देश में मिलेगा 4 गुना शुद्ध सोना
शादी के लिए ज्वैलरी से बढ़ती है गोल्ड की मांग
देश में गोल्ड ज्वैलरी की कुल मांग पहली तिमाही के दौरान 16 फीसदी बढ़कर 92.3 टन रही. पिछले साल इसी अवधि में यह मांग 79.8 टन थी. मांग आभूषणों का कुल मूल्य 24,220 करोड़ रुपये रहा. इसमें पिछले साल के मुकाबले 18 फीसदी की वृद्धि रही. इस दौरान कुल निवेश मांग भी 14 फीसदी बढ़कर 31.2 टन रही. वर्ष 2016 में निवेश मांग 27.5 टन की रही थी. निवेश मांग का मूल्य 16 प्रतिशत बढ़कर 8,200 करोड़ रुपये रहा.
सोमासुंदरम ने कहा, शादी-ब्याह के लिये सोने की मांग पहली तिमाही में काफी मजबूत रही. सोने की कुल मांग में शादी-ब्याह की मांग का 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा होता है.
सामान्य मानसून से बढ़ेगी गोल्ड डिमांड
देश में इस साल भी मानसून सामान्य रहने का अनुमान व्यक्त किये जाने से साल की दूसरी छमाही में भी सोने की मांग को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है.
राहुल मिश्र