बेस फेयर का 50 % से ज्यादा कैंसिलेशन चार्ज नहीं ले सकेंगी एयरलाइन कंपनियां

संसद की एक समिति ने प्राइवेट एयरलाइन कंपनियों को यात्रियों के साथ बेहतर रवैया अपनाने की नसीहत दी है. इस संबंध में समिति ने संसद में रिपोर्ट पेश की है.

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एयरलाइन कंपनियों को चेतावनी एयरलाइन कंपनियों को चेतावनी

aajtak.in

  • नई दिल्‍ली,
  • 28 दिसंबर 2018,
  • अपडेटेड 3:42 AM IST

अगर आप हवाई सफर करते हैं तो आपके लिए एक अच्छी खबर है. अगर  आप कोई हवाई टिकट कैंसल कराते हैं तो एयरलाइन कंपनियां बेस फेयर का 50 फीसदी से ज्यादा नहीं वसूल सकतीं. गुरुवार को संसदीय समिति (परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी) के चेयरमैन और तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने गुरुवार को इस बारे में जानकारी दी. इसके साथ ही उन्‍होंने बताया कि यात्रियों से लिया गया टैक्स और फ्यूल सरचार्ज यात्रियों को वापस मिलना चाहिए.

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उन्‍होंने कहा, ''त्योहारों के दौरान कुछ एयरलाइन कंपनियां यात्रियों से मनमाने ढंग से किराया वसूल करती हैं. अब इस तरह के किरायों को अनुमति नहीं दी जाएगी. ब्रायन ने बताया कि समिति ने कैंसिलेशन चार्ज बेस फेयर से 50 फीसदी से ज़्यादा नहीं करने की सिफारिश की है. 

एयर इंडिया का रिपोर्ट कार्ड सबसे बेहतर

इसके साथ ही यात्रियों के साथ एयरलाइन कंपनियों की बदसलूकी को लेकर भी समिति ने चिंता जाहिर की है. समिति ने इस मामले में निजी विमानन कंपनी इंडिगो की सर्वाधिक शिकायतों का हवाला देते हुए कहा कि समिति ने सभी कंपनियों से टिकट प्रणाली और यात्री सुविधा से जुड़ा ब्यौरा पेश करने को भी कहा है. ब्रायन के मुताबिक समिति के सभी सदस्यों ने कहा कि इंडिगो का रवैया यात्री हितैषी नहीं है. उन्होंने कहा कि इस मामले में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एयर इंडिया का रिपोर्ट कार्ड सबसे बेहतर पाया गया. ब्रायन ने कहा ‘‘समिति इस बात से अवगत है कि हवाई किराये को सरकारी नियंत्रण से बाहर कर दिया गया है लेकिन इसकी आड़ में यात्रियों को कंपनियों के शोषण के लिए नहीं छोड़ा जा सकता है.’’

समिति ने इसके मद्देनजर एयरलाइन कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को तलब किया. लेकिन जवाब से संतुष्ट नहीं होने के आधार पर सभी कंपनियों से कर्मचारियों को यात्री हितैषी बनाने के लिए दिए जाने वाले प्रशिक्षण का ब्यौरा पेश करने को कहा है. उन्होंने बताया कि समिति ने पर्यटन के मामले में जम्मू-कश्मीर में भी हवाई यात्रियों की इसी तरह की शिकायतें सामने आईं. समिति ने पर्यटन के मामले में लद्दाख क्षेत्र की अनदेखी किए जाने पर चिंता जाहिर की है.

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