चंदा कोचर को झटका, नौकरी से निकाले जाने की याचिका बॉम्‍बे HC से खारिज

बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंदा कोचर की उनके पद से हटाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी.

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आईसीआईसीआई बैंक की एमडी रही हैं चंदा कोचर आईसीआईसीआई बैंक की एमडी रही हैं चंदा कोचर

aajtak.in

  • नई दिल्‍ली,
  • 05 मार्च 2020,
  • अपडेटेड 11:10 PM IST

  • कोचर ने 30 नवंबर 2019 को उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी
  • 3,250 करोड़ रुपये का लोन देने में संदिग्‍ध भूमिका है चंदा कोचर की

बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंदा कोचर को बड़ा झटका दिया है. कोर्ट ने चंदा कोचर की उनके पद से हटाने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दी है. न्यायाधीश एनएम जामदार और एमएस कार्निक की खंडपीठ ने कोचर की याचिका को सुनवाई योग्य नहीं मानने की आईसीआईसीआई बैंक की दलील को स्वीकार कर लिया.

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क्‍या कहा आईसीआईसीआई बैंक ने?

बैंक ने कहा कि कोचर से जुड़ा विवाद अनुबंध पर आधारित है और यह एक निजी संस्था का विषय है. बैंक के वकील दारियस खंबाटा ने इससे पहले अदालत में दलील दी थी कि संविधान के अनुच्छेद-226 के तहत ऐसे मामलों की न्यायिक समीक्षा नहीं की जा सकती. यह अनुच्छेद उच्च न्यायालयों को ऐसे मामलों में दिशानिर्देश देने, आदेश देने या रिट जारी करने की शक्ति प्रदान करता है. बैंक ने कोचर की याचिका खारिज किए जाने की मांग की थी. कोचर को देश के दूसरे सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक से उनके बैंक को छोड़ने के कुछ महीनों बाद नौकरी से निकाल दिया गया था.

30 नवंबर 2019 को दायर की थी याचिका

बता दें कि अपने नौकरी से निकाले जाने के निर्णय को चुनौती देते हुए कोचर ने 30 नवंबर 2019 को उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी. कोचर के वकील विक्रम नानकनी ने दलील दी कि बैंक ने कोचर के स्वैच्छिक इस्तीफे को पांच अक्टूबर 2018 को स्वीकार कर लिया था. इसलिए बाद में उन्हें नौकरी से निकाला जाना अवैध है.

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कोचर ने अपनी याचिका में यह भी कहा था कि बैंक ने उनका वेतन और अप्रैल 2009 से मार्च 2018 के बीच मिले बोनस और शेयर विकल्प आय को भी देने से मना कर दिया है. कोचर पर आरोप है कि उन्होंने वीडियोकॉन समूह को अवैध तरीके से 3,250 करोड़ रुपये का ऋण देने में कथित भूमिका अदा की और इससे उनके पति दीपक को लाभ हुआ. इस मामले के सामने आने के बाद ही कोचर को अपने पद से इस्तीफा भी देना पड़ा था.

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