बैंकों पर RBI की सख्‍ती का असर! 7 साल में पहली बार घटा बैड लोन

रिजर्व बैंक के फंसे कर्ज यानी एनपीए को लेकर सख्ती का सकारात्मक असर दिखने लगा है. आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक 7 साल में पहली बार बैंकों के बैड लोन में सुधार हुआ है.

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एनपीए में आई कमी एनपीए में आई कमी

aajtak.in

  • नई दिल्‍ली,
  • 25 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 11:30 AM IST

  • बैंकों का सकल NPA अनुपात 2018-19 में घटा
  • 2017-18 में एनपीए अनुपात 11.2 फीसदी था
  • 2018-19 में घटकर 9.1 फीसदी पर आ गया

बैंकों में फंसे हुए कर्ज यानी एनपीए के मोर्चे पर अच्‍छी खबर है. केंद्रीय बैंक आरबीआई की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक सभी बैंकों का सकल एनपीए अनुपात 2018-19 में घटा है. जबकि इससे पहले लगातार 7 साल इसमें वृद्धि हुई थी. अहम बात ये है कि फंसे कर्ज को चिन्हित करने की प्रक्रिया पूरी होने के करीब पहुंचने के साथ यह कमी आई है.

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सितंबर तिमाही में 9.1 फीसदी पर स्थिर NPA

रिपोर्ट में बताया गया है कि बैंकों का सकल एनपीए (फंसा कर्ज) कर्ज अनुपात सितंबर 2019 को समाप्त तिमाही में 9.1 फीसदी पर स्थिर रहा. 2018-19 में भी इसी अवधि में एनपीए का स्तर यही था. आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सालाना आधार पर एनपीए के मोर्चे पर अच्छा सुधार दिखता है. जहां 2017-18 में एनपीए अनुपात 11.2 फीसदी था, वह 2018-19 में घटकर 9.1 फीसदी पर आ गया. इस लिहाज से सालाना आधार पर 2.1 फीसदी की कमी आई है.

वहीं सभी कॉमर्शियल बैंकों की शुद्ध एनपीए 2018-19 में पिछले साल के मुकाबले लगभग आधा घटकर 3.7 फीसदी पर आ गई जबकि इससे पूर्व वित्त वर्ष में यह अनुपात 6 फीसदी था. यह बैंक प्रणाली की स्थिति में सुधार को दिखाता है. पब्‍लिक सेक्‍टर के बैंकों का सकल एनपीए 2018-19 में सुधरकर 11.6 फीसदी पर आ गया जो 2017-18 में 14.6 फीसदी था. वहीं शुद्ध एनपीए इस दौरान 8 फीसदी से घटकर 4.8 फीसदी पर आ गया.

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प्राइवेट सेक्‍टर के बैंकों का NPA बढ़ा

रिपोर्ट के मुताबिक प्राइवेट सेक्‍टर के बैंकों का सकल एनपीए इस दौरान बढ़ा है. जहां 2017-18 में यह 4.7 फीसदी था, वह 2018-19 में बढ़कर 5.3 फीसदी पर आ गया. वहीं शुद्ध एनपीए 2.4 फीसदी के मुकाबले 2 फीसदी रहा. इसका कारण आईडीबीआई बैंक का एनपीए है. बता दें कि एलआईसी के अधिग्रहण के बाद इसे प्राइवेट सेक्‍टर का बैंक माना गया है.हालांकिआईडीबीआई बैंक को हटा दिया जाए तो प्राइवेट सेक्‍टर के बैंकों का सकल एनपीए अनुपात कम हुआ है. वर्ष 2018-19 में आईडीबीआई बैंक का एनपीए अनुपात 29.4 फीसदी पर था.

कृषि कर्ज माफी का भी असर

आरबीआई द्वारा कृषि कर्ज की समीक्षा के लिये गठित आंतरिक कार्यकारी समूह के अनुसार उन राज्यों में एनपीए का स्तर बढ़ा है जहां 2017-18 और 2018-19 में कृषि कर्ज माफी की घोषणा की गई. औद्योगिक क्षेत्र में सकल एनपीए 17.4 फीसदी पर बना हुआ है. यह सितंबर 2019 के अंत में कुल फंसे कर्ज का दो तिहाई है. रिपोर्ट की मानें तो 2017-18 में 5 करोड़ रुपये और उससे अधिक के बड़े कर्जों का जीएनपीए में योगदान 91 फीसदी था.

एनबीएफसी क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित

गैर- बैंकिंग क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियों द्वारा भुगतान दायित्वों को समय पर पूरा नहीं कर पाने के चलते गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) क्षेत्र का सकल एनपीए अनुपात बढ़ा है. साल 2017-18 में सकल एनपीए 5.3 फीसदी पर था 2018-19 में उछलकर 6.1 फीसदी पर पहुंच गया. आईएलएंडएफएस के कर्ज भुगतान में असफल रहने की वजह से एनबीएफसी क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है. रिपोर्टके मुता‍बिक 2019-20 में सितंबर तक सकल एनपीए अनुपात में मामूली वृद्धि से एनबीएफसी क्षेत्र की परिसंपत्ति गुणवत्ता बिगड़ी है. हालांकि, रिपोर्ट में एनबीएफसी के सितंबर एनपीए अनुपात का आंकड़ा नहीं दिया गया है.

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