1100 करोड़ के फ्रॉड से बाल-बाल बचा था यूनियन बैंक, 17 महीने पहले SWIFT में हुई थी गड़बड़ी

स्व‍िफ्ट की गड़बड़ी से झटक लिया गया करीब 1100 करोड़ का फंड रिजर्व बैंक और यूनियन बैंक के अधिकारियों की मुस्तैदी से वापस मिल गया था.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

दिनेश अग्रहरि

  • नई दिल्ली,
  • 20 फरवरी 2018,
  • अपडेटेड 4:09 PM IST

पीएनबी घोटाले के सामने आने से करीब 17 महीने पहले रिजर्व बैंक की मुस्तैदी से यूनियन बैंक ऑफ इंडिया इसी तरह के एक फ्रॉड से बच गया था. स्व‍िफ्ट की गड़बड़ी से झटक लिया गया करीब 1100 करोड़ का फंड रिजर्व बैंक और यूनियन बैंक के अधिकारियों की मुस्तैदी से वापस मिल गया था.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, यह घटना जुलाई 2016 की है. इसका पता चलते ही बैंक ने तत्काल 'बचाव के कदम' उठाए थे. जनवरी, 2017 में रिजर्व बैंक के तत्कालीन डिप्टी गवर्नर एस.एस. मुंद्रा ने बैंकिंग सेक्टर के प्रतिनिधियों से खासकर SWIFT प्लेटफॉर्म के किसी तरह के दुरुपयोग को लेकर चेताया था. तब उन्होंने कहा था, 'SWIFT मैसेजिंग सिस्टम में गड़बड़ी कर हम एक बैंक में जालसाजी की कोशिश देख चुके हैं. सौभाग्य से इसमें किसी तरह का मौद्रिक नुकसान नहीं हो पाया और ऐसा फ्रॉड होने से बचा लिया गया.'  

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कैसे की गई फ्रॉड की कोशिश

जुलाई 2016 में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के ट्रेजरी विभाग में गड़बड़ी सामने आई थी. साइबर क्राइम के द्वारा बिना किसी ऑथराइजेशन के भुगतान मोड का इस्तेमाल करते हुए 17 करोड़ डॉलर यानी करीब 1100 करोड़ रुपये डेबिट हो गए थे. यह असल में हैकिंग के द्वारा हुआ था. एक बैंक कर्मी ने मैलवेयर वाला ई-मेल खोला जिसके द्वारा साइबर अपराधियों ने SWIFT के द्वारा पैसा ट्रांसफर कर लिया.

बैंक के ट्रेजरी विभाग के एक कर्मचारी ने जब 20 जुलाई, 2016 को डॉलर एकाउंट का दिन भर का स्टेटमेंट चेक किया तो उसे इस अनाधिकृत भुगतान की जानकारी मिली. लेकिन रिजर्व बैंक, यूनियन बैंक के अधिकारियों ने मिलकर तत्काल कार्रवाई शुरू की और दो अमेरिकी बैंकों के माध्यम से ट्रांसफर फंड को वापस हासिल कर लिया, जहां यूनियन बैंक का नॉस्ट्रो एकाउंट है.

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गौरतलब है कि पंजाब नेशनल बैंक में नीरव और उसकी कंपनी के लोगों द्वारा SWIFT व्यवस्था में गड़बड़ी कर ही घोटाला करने की रिपोर्ट है. सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि पंजाब नेशनल बैंक के घूसखोर अफसरों ने 2 फीसदी कमीशन के लालच में SWIFT का लॉग-इन पासवर्ड ही नीरव मोदी के अफसरों को सौंप दिए थे और अक्सर वे बैंक के कंप्यूटर पर बैठकर खुद ही SWIFT में गड़बड़ी करते थे.

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