साल 2025 भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बड़े बदलावों का गवाह रहा, जिसने निवेश और कंस्ट्रक्शन के पुराने तौर-तरीकों को काफी हद तक बदल दिया, लेकिन अब 2026 एक ऐसा ऐतिहासिक मोड़ साबित होने वाला है, जहां यह सेक्टर अपनी पूरी कार्यप्रणाली और पैमाना ही बदल देगा. अब बाज़ार केवल 'बिक्री के आंकड़ों' तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका पूरा केंद्र बिंदु 'क्वालिटी, सस्टेनेबिलिटी और एडवांस टेक्नोलॉजी' पर शिफ्ट हो जाएगा. 2026 में प्रॉपर्टी मार्केट में कई ऐसे बड़े बदलाव होंगे जो खरीदारों और निवेशकों के अनुभव को एक नए स्तर पर ले जाएंगे.
लग्जरी और प्रीमियम सेगमेंट का दबदबा
अब घर केवल एक रिहाइश नहीं बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा और मानसिक सुकून का पैमाना बन गया है. उच्च आय वाले प्रोफेशनल्स और मिलेनियल्स अब बड़े स्पेस, आधुनिक क्लब हाउस, और सुरक्षित वातावरण के लिए ₹1.5 करोड़ से ₹3 करोड़ तक खर्च करने को तैयार हैं, क्योंकि वे हाइब्रिड वर्क कल्चर के दौर में घर के भीतर ही ऑफिस, जिम और मनोरंजन जैसी तमाम सुविधाएं चाहते हैं. यही कारण है कि ब्रांडेड डेवलपर्स अब छोटे घरों के बजाय बेहतरीन एमेनिटीज वाले प्रीमियम और मिड-सेगमेंट प्रोजेक्ट्स पर सबसे ज्यादा दांव लगा रहे हैं, जो 2026 के मार्केट की दिशा तय करेंगे. 2025 में भी रियल एस्टेट मार्केट इस बात का गवाह रहा है लोगों ने लग्जरी और प्रीमियम सेगमेंट घरों की खूब खरीदारी की.
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टियर-2 और टियर-3 शहरों का उदय
मेट्रो शहरों में जमीन की सीमित उपलब्धता और आसमान छूती कीमतों ने निवेशकों के लिए 'रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट' (ROI) को कम कर दिया है, जिसके चलते अब कोच्चि, जयपुर, अहमदाबाद और चंडीगढ़ जैसे टियर-2 शहर नए इन्वेस्टमेंट हब बनकर उभरे हैं. इन शहरों में नेशनल हाईवे, नए एयरपोर्ट्स और मेट्रो विस्तार जैसे बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर ने कनेक्टिविटी को सुधारा है, जिससे यहां न केवल रहने की लागत कम है, बल्कि प्रॉपर्टी एप्रिसिएशन की संभावना महानगरों के मुकाबले कहीं अधिक है. साथ ही, आईटी पार्कों के विस्तार और 'वर्क फ्रॉम एनीवेयर' कल्चर ने इन शहरों में क्वालिटी हाउसिंग की मांग बढ़ा दी है, जिससे कम निवेश में अधिक रेंटल यील्ड और भविष्य की सुरक्षा चाहने वाले निवेशकों के लिए ये शहर पहली पसंद बन गए हैं.
ग्रीन कंस्ट्रक्शन और नेट ज़ीरो होम
2026 तक नई सप्लाई का करीब 80-90% हिस्सा ग्रीन सर्टिफाइड होने की उम्मीद है, खरीदार अब सोलर पैनल, रेनवाटर हार्वेस्टिंग और वेस्ट मैनेजमेंट जैसी सुविधाओं वाले घरों को प्राथमिकता दे रहे हैं. पर्यावरण के प्रति जागरूकता अब एक लग्जरी नहीं, बल्कि जरूरत बन गई है.
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फ्रैक्शनल ओनरशिप (Fractional Ownership)
आम आदमी के लिए करोड़ों की कमर्शियल प्रॉपर्टी में निवेश करना अब संभव होगा. 'स्मॉल एंड मीडियम REITs' (SM-REITs) के आने से लोग 10-25 लाख रुपये लगाकर भी ऑफिस स्पेस या मॉल के मालिक बन सकेंगे और रेंटल इनकम कमा सकेंगे.
वर्क-फ्रॉम-एनीवेयर और को-लिविंग स्पेस
वर्क-फ्रॉम-एनीवेयर' संस्कृति ने पारंपरिक दफ्तरों की अनिवार्यता खत्म कर दी है, जिससे प्रोफेशनल्स अब किसी एक शहर तक सीमित रहने के बजाय अपनी पसंद की लोकेशन से काम करना पसंद कर रहे हैं. इस बदलाव ने 'को-लिविंग' (Co-living) और 'मैनेज्ड स्टूडेंट हाउसिंग' की मांग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है, जहां युवाओं को न केवल हाई-स्पीड इंटरनेट और डेडिकेटेड वर्कस्टेशन मिलते हैं, बल्कि एक ऐसी कम्युनिटी भी मिलती है जो अकेलेपन को दूर करती है. 2026 तक यह मॉडल इसलिए भी सफल रहेगा क्योंकि यह खरीदारों या किराएदारों को भारी डिपॉजिट और फर्नीचर के झंझट से मुक्ति देता है, साथ ही एक 'प्लग-एंड-प्ले' लाइफस्टाइल प्रदान करता है जो आज की मोबाइल वर्कफोर्स के लिए बेहद किफायती और सुविधाजनक है.
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AI और प्रोप-टेक (PropTech) का एकीकरण
अब प्रॉपर्टी खरीदना या बेचना सिर्फ ब्रोकर के भरोसे नहीं रहेगा, क्योंकि AI और टेक्नोलॉजी ने पूरे खेल को बदल दिया है. अब आपको घर देखने के लिए चिलचिलाती धूप में बाहर निकलने की ज़रूरत नहीं होगी. आप घर बैठे वर्चुअल टूर के जरिए हर कोना ऐसे देख पाएंगे जैसे आप वहीं मौजूद हों. इतना ही नहीं, बड़ी कंपनियां अब AI का इस्तेमाल यह जानने के लिए कर रही हैं कि आने वाले समय में किस इलाके के दाम बढ़ेंगे और कहां निवेश करना सबसे फायदेमंद होगा. कंस्ट्रक्शन के काम में भी अब रोबोटिक्स और स्मार्ट सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल हो रहा है ताकि काम जल्दी और बिना किसी गलती के पूरा हो. 2026 तक टेक्नोलॉजी घर खरीदने के अनुभव को ऑनलाइन शॉपिंग जितना आसान और पारदर्शी बना देगी.
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