2024 के लोकसभा चुनावों को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियां तैयारियों में जुटी हैं. एक तरफ बीजेपी फिर से बहुमत के साथ सत्ता में आने का दावा कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ महागठबंधन की कवायद भी शुरू होती नजर आ रही है. इसके अलावा कांग्रेस भी अपनी खोई साख जुटाने में लगी है. इस सबके बीच उत्तर प्रदेश की फर्रुखाबाद लोकसभा के चुनावी समीकरण पर चौपाल आयोजित की गई. चौपाल आगामी 2024 के लोकसभा चुनाव में जनता का रुख मिला जुला दिखाई दिया. वहीं मौजूदा सांसद के विकास कार्यो को लेकर जनता नाखुश नज़र आई. पत्रकारों की राय भी मौजूदा सरकार के पक्ष में दिखाई दी.
दरअसल, चुनावी समीकरण में जातीय समीकरण अधिक प्रभावी दिखाई दे रहे हैं. फर्रुखाबाद लोकसभा में 5 विधानसभा हैं, जिसमें से 4 विधानसभा जनपद फर्रुखाबाद की फर्रुखाबाद सदर,भोजपुर,अमृतपुर, कायमगंज विधानसभा है तो वहीं एक जनपद एटा की अलीगंज विधानसभा है. 2019 लोकसभा चुनाव में फर्रुखाबाद जनपद में 17 लाख से अधिक मतदाता थे. पिछले 3 लोकसभा चुनावों की बात करें तो वर्ष 2019 के चुनाव में भाजपा से सांसद मुकेश राजपूत चुने गए थे, वहीं 2014 के चुनाव में भी जनता ने भाजपा प्रत्याशी मुकेश राजपूत पर ही विश्वास कर उनको जीत दर्ज कराई थी, जबकि 2009 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी सलमान खुर्शीद ने विजय हासिल कर कैबिनेट मंत्री का पद पाया था.
फर्रुखाबाद लोक सभा मे पिछड़ी जाति के मतदाताओं की संख्या अधिक है. सर्वाधिक संख्या लोधी राजपूत मतदाताओं की है. वहीं यादव, पाल, कहांर मतदाता भी काफी संख्या में हैं. सवर्ण मतदाताओं में ठाकुर मतदाता भी अच्छी संख्या में हैं. जिसके बाद ब्राह्मण मतदाता हैं. वहीं अल्पसंख्यक मतदाताओं भी यहां हैं. अनुसूचित जाति के मतदाताओं में सर्वाधिक संख्या जाटव मतदाताओं की है.
यूपी की चौपाल में जनता से आगामी लोकसभा चुनाव के बारे में पूछा गया तो फर्रुखाबाद की जनता की राय मिली-जुली नजर आई. कुछ का कहना था कि मजबूत विकल्प ना होने के कारण फिर से भारतीय जनता पार्टी जीत दोहरा सकती है. वहीं कुछ का कहना था फिर लोकसभा में जीत दोहराना कड़ा साबित हो सकता है. जनपद में सांसद द्वारा किए गए विकास कार्य के बारे में भी सबकी एक राय नजर आई. जिसमें उन्होंने कहा कि जनपद में विकास कार्य नहीं हुए हैं. लेकिन फिर भी मोदी पर भरोसा किया सकता है.
फिरोज़ खान