राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक आज से उत्तर प्रदेश के मथुरा में शुरू हो गई है. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने दीप प्रज्ज्वलन कर 'अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल' की दो दिवसीय बैठक की औपचारिक शुरुआत की. आरएसएस के पदाधिकारी ब्रज प्रांत के परखम स्थित गऊ ग्राम में 25 और 26 अक्टूबर तक मंथन करेंगे. यूपी उपचुनाव से पहले यह बैठक अहम मानी जा रही है और इसके मायने भी निकाले जा रहे हैं.
दीनदयाल उपाध्याय गाय विज्ञान, अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित बैठक में अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल में संघ के सभी 46 प्रांतों के प्रांत एवं सह प्रांत संघचालक, कार्यवाह, प्रचारक हिस्सा लेंगे. बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल, सीए मुकुंदा, अरुण कुमार, रामदत्त चक्रधर, आलोक कुमार, अतुल लिमये और अखिल भारतीय कार्य विभाग प्रमुख एवं कार्यकारिणी के सदस्यों सहित 393 कार्यकर्ता हिस्सा लेंगे.
आरएसएस हर साल ऐसी तीन अखिल भारतीय बैठकें आयोजित करता है. सरसंघचालक ने विजयादशमी संबोधन में परिवर्तन के पांच प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख किया था. इनमें सामाजिक सद्भाव, पारिवारिक जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य और अपने स्वयं के मूल्यों के अनुसार जीना. बैठक में ये पांच बिंदु सामाजिक परिवर्तन के लिए चर्चा का भी हिस्सा होंगे.
सभी पदाधिकारी अपने-अपने प्रांतों में पूरे साल किए गए कार्यों को साझा करेंगे और विभिन्न विषयों पर चर्चा करेंगे. वे आगामी वर्ष के लिए लक्ष्यों और योजनाओं की रूपरेखा भी तैयार करेंगे और इन मामलों पर वरिष्ठ पदाधिकारियों का मार्गदर्शन लेंगे. गुजरात, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में संकट के समय आरएसएस द्वारा किए गए राहत प्रयासों पर भी चर्चा की जाएगी. इन क्षेत्रों में स्थायी परियोजनाएं स्थापित करने की योजनाएं तलाशी जाएंगी.
अगला वर्ष आरएसएस की स्थापना का शताब्दी वर्ष है. आरएसएस पदाधिकारी शताब्दी वर्ष से संबंधित विशेष संगठनात्मक लक्ष्यों की समीक्षा करेंगे और शताब्दी वर्ष के भव्य उत्सव की योजनाओं पर चर्चा करेंगे.
यह बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण है. संघ प्रमुख मोहन भागवत इस बैठक के लिए मथुरा में 10 दिन के प्रवास पर थे. बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व हरियाणा के बाद अब महाराष्ट्र, झारखंड और उत्तर प्रदेश में होने वाले उपचुनाव में आरएसएस का समर्थन चाहता है.
बैठक का एजेंडा क्या है?
बैठक में RSS की सालभर की कार्य योजना तय की जाएगी. इसके अलावा, ओटीटी प्लेटफॉर्म पर निगेटिव कंटेंट समेत अन्य कई महत्वपूर्ण मसलों पर मंथन किया जाएगा. पंच परिवर्तन के साथ संघ शताब्दी वर्ष में अपना कार्य विस्तार करेगा. समाज में शांति, परस्पर सौहार्द्र और समरसता भी बैठक की चर्चा में फोकस पॉइंट रहेंगे. संघ का कहना है कि बैठक में बच्चों पर सोशल मीडिया का गलत प्रभाव, सरकार की तरफ से इंटरनेट रेगुलेशन और जमीनी स्तर पर संगठन के विस्तार पर चर्चा की जाएगी.
अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर कहते हैं कि शताब्दी वर्ष से पहले संगठन के विस्तार की योजना है. इस बैठक में इस विषय पर भी चर्चा की जाएगी. अंबेकर का कहना था कि सरसंघचालक मोहन भागवत ने विजयादशमी संबोधन में समाज की एकता और भ्रम को रोकने समेत जिन विषयों का उल्लेख किया था, उन पर चर्चा की जाएगी. समाज को एकजुट रखने और किसी भी तरह के भ्रम में पड़ने से बचने के लिए जरूरी प्रयासों पर विचार-विमर्श किया जाएगा.
दरअसल, आरएसएस प्रमुख ने विजयादशमी संबोधन के दौरान इस बात पर भी चिंता जताई थी कि इंटरनेट के विभिन्न प्लेटफार्मों, खासकर सोशल मीडिया पर बच्चों को कैसे गुमराह किया जा रहा है. उन्होंने ऐसे कंटेंट के निगेटिव रिजल्ट के बारे में चेताया था और सरकारी रेगुलेशन की जरूरत पर बल दिया था. इस संबंध में मंथन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि शांति, सद्भाव और सामाजिक एकजुटता को बढ़ावा देने पर चर्चा होगी और इस दिशा में चल रहे प्रयासों को कैसे आगे बढ़ाया जाए, इस पर योजना बनाई जाएगी.
आंबेकर का कहना था कि इस बात पर भी चर्चा होगी कि जमीनी स्तर पर आरएसएस का विस्तार कैसे जारी रखा जाए. शाखाओं और साप्ताहिक बैठकों समेत 2025 में विजयादशमी तक इन लक्ष्यों को प्राप्त करने की योजना पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा. महर्षि दयानंद सरस्वती, बिरसा मुंडा, अहिल्या बाई होल्कर, रानी दुर्गावती और सतगुरु अनुकूल चंद्र ठाकुर जैसी हस्तियों के योगदान का जश्न मनाया जाएगा. उनके विचारों और शिक्षाओं को विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए समाज के साथ साझा किया जाएगा.
दो दिन का 'मथुरा मंथन' क्यों अहम है?
चूंकि, आरएसएस को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी का वैचारिक संगठन माना जाता है. इस बैठक में से ना सिर्फ आरएसएस वर्कर्स में ऊर्जा आएगी, बल्कि उपचुनाव में बीजेपी के लिए भी मददगार होगी. आरएसएस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को अपने वरिष्ठों से मार्गदर्शन मिलेगा. बीते दिनों मथुरा दौरे पर आए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की थी. औपचारिक रूप से यही कहा गया कि सीएम योगी ने संघ प्रमुख को महाकुंभ में आने का न्योता दिया है. लेकिन चर्चा है कि यह बैठक सिर्फ औपचारिकता तक सीमित नहीं थी. सूत्रों के अनुसार, बैठक में यूपी की राजनीति, खासकर आगामी उपचुनावों और संघ कार्यकर्ताओं की भूमिका पर भी गहन चर्चा हुई.
उपचुनाव में बीजेपी का सहयोग करेंगे RSS वर्कर्स?
करीब 45 मिनट तक बंद कमरे में चली इस मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, सीएम योगी की संघ प्रमुख से उपचुनाव में संघ से जुड़े स्वयंसेवकों के इस्तेमाल को लेकर बात हुई और दोनों नेताओं ने संघ से मिलने वाले फीडबैक पर भी चर्चा की. सूत्रों का कहना है कि संघ प्रमुख ने सीएम योगी को आश्वस्त किया कि स्वयंसेवक हरियाणा की तर्ज पर यूपी उपचुनाव में भी बीजेपी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे और पूरी मदद करेंगे.
इस बैठक से यह भी संकेत मिला है कि संघ और बीजेपी के बीच समन्वय को लेकर बेहतर तालमेल बन रहा है. संघ की तरफ से फीडबैक और सहायता का सीधा असर चुनाव नतीजों में देखने को मिल सकता है. सीएम योगी ने आरएसएस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से पहले मथुरा में महासचिव दत्तात्रेय होसबले से भी मुलाकात की थी और सप्त कुटीर में ढाई घंटे से अधिक समय तक रहे थे.
दरअसल, यूपी की 9 सीटों के उपचुनाव को प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा है. इसे सीएम योगी की लोकप्रियता का लिटमस टेस्ट भी माना जा रहा है. कहा ये भी जा रहा है कि ये उपचुनाव पूरी तरीके से सीएम योगी का चुनाव है. यही वजह है कि सीएम योगी एक तरफ जहां उपचुनाव वाली हर सीट पर नजर रख रहे हैं, वहीं रणनीति तय करने से लेकर प्रचार के मोर्चे तक सक्रिय नजर आ रहे हैं. बीजेपी और संघ के बीच समन्वय को लेकर भी खुद ही फ्रंट पर आ गए हैं. चर्चा है कि संघ प्रमुख के साथ मुलाकात के दौरान सीएम योगी की संघ और बीजेपी में समन्वय पर भी बात हुई है.
हरियाणा के हालिया चुनाव में बीजेपी ने लगातार तीसरी बार जीत हासिल की है. इसके पीछे संघ की सक्रिय भूमिका को क्रेडिट दिया गया है. माना गया कि ऐसे नतीजे संघ के कंधे से कंधा मिलाकर चलने की वजह से आ पाए हैं.
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