24 घंटे में खुला इंसाफ का ताला... अंजना को हक और हौसले की लड़ाई में मिला सीएम योगी का साथ

लखनऊ के इंदिरा नगर में मेजर की बेटी अंजना को मुख्यमंत्री से शिकायत करने के बाद 24 घंटे के भीतर उसका मकान वापस दिला दिया गया. मानसिक बीमारी से जूझ रहीं अंजना के घर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए कब्जा किया गया था. सीएम के आदेश के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया और मकान का कब्जा पीड़िता को सौंप दिया.

Advertisement
अपन मकान को फिर से  पाकर खुशी जताती अंजना (Photo: ITG) अपन मकान को फिर से पाकर खुशी जताती अंजना (Photo: ITG)

आशीष श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 02 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:59 AM IST

लखनऊ के इंदिरा नगर का ए-418 नंबर मकान गुरुवार को फिर खुला, लेकिन यह सिर्फ एक घर के ताले खुलने की कहानी नहीं थी. यह उस महिला की वापसी थी, जिसने पिता, भाई-बहन और फिर अपना मानसिक संतुलन खोने के बाद भी अपने हक की उम्मीद नहीं छोड़ी थी. वर्षों बाद अंजना अपने उसी घर में खड़ी थीं, जिसे कुछ समय पहले तक वह हमेशा के लिए खो चुकी मान चुकी थीं.

Advertisement

अंजना के पिता स्वर्गीय बिपिन चंद्र भट्ट भारतीय सेना में मेजर थे. देश की सेवा के दौरान उन्होंने लखनऊ के इंदिरा नगर में ए-418 नंबर का मकान बनवाया था. यही मकान कभी इस परिवार की पहचान हुआ करता था. साल 1994 में मेजर भट्ट का निधन हुआ. उस वक्त परिवार में बेटा और दो बेटियां थीं. समय के साथ हालात बदलते गए. बेटे और एक बेटी की असमय मौत ने परिवार को भीतर से तोड़ दिया. अकेली बचीं अंजना. लगातार आघातों ने उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया और धीरे-धीरे उन्हें सिजोफ्रेनिया जैसी गंभीर बीमारी ने घेर लिया.

साल 2016 में हालत बिगड़ने पर अंजना को निर्वाण रिहैब सेंटर में भर्ती कराया गया. इलाज शुरू हुआ, लेकिन इसी दौर में उनके जीवन की सबसे बड़ी साजिश रची जा रही थी. जिस घर को उन्होंने कभी सुरक्षित ठिकाना माना था, वही निशाने पर आ गया. जांच में सामने आया कि बलवंत कुमार यादव और मनोज कुमार यादव ने अंजना की बीमारी और अकेलेपन का फायदा उठाया. फर्जी दस्तावेज तैयार कर मकान पर कब्जे की तैयारी की गई. धीरे-धीरे घर पर बाहरी लोगों का आना-जाना बढ़ा और एक दिन मकान पर किसी और का नाम लिखा बोर्ड लग गया. अंजना को जब इसकी जानकारी मिली, तो यह उनके लिए किसी झटके से कम नहीं था. जिस घर से उनका बचपन, परिवार और पहचान जुड़ी थी, वह उनसे छीना जा चुका था वो भी कागजों की चालबाजी से.

Advertisement

थाने से लेकर दफ्तरों तक की गई कोशिशें

रिहैब सेंटर के डॉक्टर संतोष दुबे बताते हैं कि अंजना ने पहले स्थानीय थाने में शिकायत दी. 6 दिसंबर को लिखित प्रार्थना पत्र दिया गया, लेकिन कार्रवाई की रफ्तार धीमी रही. अंजना मानसिक बीमारी से जूझ रही थीं, लेकिन हालात की गंभीरता उन्हें पूरी तरह समझ में आ रही थी. डॉक्टरों और शुभचिंतकों ने उनका साथ दिया, पर कब्जाधारियों के हौसले बुलंद थे. अंजना को महसूस होने लगा कि यदि अब भी आवाज नहीं उठाई, तो सब कुछ हमेशा के लिए हाथ से निकल जाएगा.

सीएम योगी से की मुलाकात 

31 दिसंबर की शाम अंजना मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचीं.  उन्हें पूरी बात विस्तार से बताई गई. मुख्यमंत्री कार्यालय से निर्देश मिलने के बाद मामला अचानक गति में आ गया. स्थानीय पुलिस और प्रशासन हरकत में आया. दस्तावेज खंगाले गए, जमीन रिकॉर्ड की जांच हुई और पूरे घटनाक्रम को जोड़कर देखा गया. गुरुवार की सुबह तक तस्वीर साफ हो चुकी थी. जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया और दोपहर से पहले ही अंजना को उनका मकान वापस दिला दिया गया. मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों की निगरानी में ताले खुलवाए गए. जैसे ही अंजना घर के अंदर दाखिल हुईं, उनकी आंखें भर आईं. वे एक-एक कमरे में गईं

Advertisement

दहलीज पर टूटी चुप्पी

घर के बाहर आकर उन्होंने नारियल फोड़ा, दीप जलाया और फूल रखे. अंजना फूट-फूटकर रोने लगीं. पुलिस ने इस मामले में बलवंत कुमार यादव उर्फ बब्लू और मनोज कुमार यादव को गिरफ्तार कर लिया है. एसीपी गाजीपुर अनिंद्य विक्रम सिंह के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना से जुड़े साक्ष्य मिले हैं. फर्जी दस्तावेज और अन्य सामग्री जब्त कर ली गई है. पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन शामिल था.
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement