चारों तरफ नए साल का जश्न मनाया जा रहा है. 2026 का आगमन हो चुका है. ऐसे में 2025 में पूरे साल ये चर्चा होती रही कि 2026 में तो दुनिया ही खत्म हो जाएगी. इस पर सोशल मीडिया पर कई मीम्स और रील्स भी वायरल हुए. क्या सच में क्या 2026 में प्रलय आ जाएगी? क्या इसी साल कयामत का दिन आने वाला है.
द प्रोविंस जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, हेंज वॉन फोस्टर नाम के 1960 में एक भविष्यवाणी की थी कि 2026 में दुनिया खत्म हो जाएगी. अब सवाल उठता है कि 1960 में 2026 को लेकर क्या भविष्यवाणी की गई थी. क्या उस भविष्यवाणी में दुनिया के अंत को लेकर कोई समय या तिथि की भी घोषणा की गई थी?
टाइम मैगजीन की एक रिपोर्ट के अनुसार, भौतिक विज्ञानी हेंज वॉन फोस्टर , जिनका 2002 में निधन हो गया, उन्होंने 1960 में "साइंस" नामक पत्रिका में दावा किया था कि दुनिया 2020 के दशक में कभी भी समाप्त हो सकती है. हेंज वॉन फोस्टर ने दावा किया था कि 13 नवंबर, 2026 को दुनिया का अंत हो जाएगा. उन्होंने 1960 में "साइंस" नामक पत्रिका में दावे करते हुए इस विशेष दिन की भविष्यवाणी की थी.
वॉन फोस्टर ने दुनिया के अंत का दावा क्यों किया?
टाइम पत्रिका की रिपोर्ट में , जिसमें वॉन फोस्टर की "साइंस" में प्रकाशित मूल रिपोर्ट का हवाला दिया गया था, वॉन फोस्टर ने कहा था कि हमारे परपोते-परपोतियां भूख से नहीं मरेंगे. वे दम घुटकर मर जाएंगे. वॉन फोस्टर ने 1960 में कहा था कि मानव जाति "असीमित" जनसंख्या वृद्धि के कारण विलुप्त हो जाएगी, यदि इससे पहले वह परमाणु युद्ध या अन्य तरीकों से स्वयं को नष्ट नहीं कर लेती है. हालांकि, अभी तक परमाणु युद्ध नहीं हुआ है.
इस दिन खत्म हो जाएगी दुनिया?
वॉन फोस्टर ने के अनुसार प्रलय तब आएगी जब लोगों की संख्या अनंत तक पहुंच जाएगी और चतुर आबादी खुद को ही नष्ट कर लेगी. इसके लिए सबसे संभावित तिथि शुक्रवार, 13 नवंबर, 2026 है. उन्होंने कहा था कि कोई भी जनसंख्या जो तीव्र गति से बढ़ती है (जैसा कि मानव जाति कर रही है) अंततः विनाश की ओर अग्रसर होती है. उनका कहना है कि सबसे अच्छी फूड प्रौद्योगिकी भी लगातार बढ़ती जनसंख्या वृद्धि की गति से आगे नहीं निकल सकती.
टाइम पत्रिका के लेख में, वॉन फोर्स्टर ने घोषणा की है कि यदि मानव जाति असीमित रूप से भीड़भाड़ वाली आबादी के प्रलय से बचना चाहती है, तो उसे दुनिया की आबादी को एक संतुलित स्तर पर रखने के लिए एक कंट्रोल सिस्टम, यानी एक 'पीपल-स्टेट' स्थापित करना होगा.
उन्होंने कहा था कि दो से अधिक बच्चों वाले परिवारों पर भारी कर लगाना उचित होगा. क्योंकि जन्म दर और मृत्यु दर के बीच का अंतर हर मिनट बढ़ता जा रहा है. उस वक्त सभी लोग उनके आकलन से सहमत नहीं थे.
2026 में दुनिया खत्म होने की चर्चा शुरू होने की दूसरी वजह 2025 2025 की शुरुआत में, फेमस "प्रलय की घड़ी" यानी 'डूम्सडे क्लॉक' की सुईयां विनाश के और करीब पहुंच गई थी. इसलिए भी पिछले साल काफी चर्चा होती रही कि आने वाले 2026 में पृथ्वी का अंत हो सकता है. क्योंकि, प्रलय की घड़ी में अगले साल यानी 2026 में सुईयां 12 बजे पर पहुंच जाएगी, जिसका मतलब होता है, दुनिया का अंत.
'प्रलय घड़ी' क्या है?
2025 की शुरुआत में "प्रलय घड़ी" के रीसेट होने के अनुसार, मानवता अपने आप को नष्ट करने के सबसे करीब पहुंच गई थी. इसके बाद प्रतीकात्मक घड़ी को आधी रात से 89 सेकंड पहले पर सेट कर दिया गया, जो 2024 से एक सेकंड आगे बढ़ गई थी. यानी प्रलय की तिथि के कुछ नजदीक पहुंच चुकी थी.
मूल रूप से, इस घड़ी की शुरुआत 1947 में परमाणु आपदा के खतरे को मापने के लिए किया गया था. पिछले दो दशकों में पृथ्वी के विनाश की वजह के तौर पर चिंता के तीन अन्य क्षेत्रों को जोड़ा गया है- जलवायु परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और गलत सूचना.
जब से इसे पेश किया गया है, तब से यह घड़ी अब "आधी रात " (पृथ्वी के अंत) के सबसे करीब है. हालांकि, घड़ी केवल एक सेकंड आगे बढ़ी है, लेकिन यह दुनिया के सामने मौजूद खतरों का एक महत्वपूर्ण संकेतक है. 2024 और फिर 2025 में सुईयों का एक-एक सेकंड आगे बढ़ना और विनाश के करीब आते जाने से भी यह चर्चा शुरू हुई कि 2026 में दुनिया का अंत हो जाएगा.
इस डूम्सडे क्लॉक को बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स के विज्ञान और सुरक्षा बोर्ड रीसेट करता है. इस बोर्ड के अध्यक्ष डैन होल्ज़ ने कहा कि बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स इस बात का आकलन करता है कि हम मानवता के अंत के कितने करीब हैं.
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